गवाहों को अब मिलेगी सुरक्षा तीन सदस्यीय कमेटी का गठन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Nov 2019 8:27 AM (IST)
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कटिहार : न्यायालय में धमकियों के डर से आपराधिक मामलों में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने वाले गवाहों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी गठित की गयी है. जिसके अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश सचिव जिला […]
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कटिहार : न्यायालय में धमकियों के डर से आपराधिक मामलों में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने वाले गवाहों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी गठित की गयी है. जिसके अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश सचिव जिला अभियोजन पदाधिकारी तथा सदस्य पुलिस अधीक्षक होंगे. इस कमेटी की बैठक व्यवहार न्यायालय के सभागार में हुई.
उक्त बातों की जानकारी देते हुए जिला अभियोजन पदाधिकारी सह कमेटी के सचिव एसके अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि अपराधिक मामलों में गवाहों गवाही नहीं देने की किसी भी प्रकार की धमकी अभियुक्त या उसकी ओर से दिया जाता है. तो संबंधित गवाह के आवेदन पर विचारोंप्रांत आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जायेगी. सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश आपराधिक मामलों में आने वाले गवाहों के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है.
ज्ञात हो कि कई ऐसे संगीन मामले में गवाहों का नहीं आना उसकी आत्म सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कारण रहा है. दरअसल गवाहों के नहीं आने पर न्यायालय द्वारा वारंट तक जारी किये जाते हैं. लेकिन जमीनी हकीकत यह होती है कि गवाह स्वयं की सुरक्षा को लेकर न्यायालय में नहीं आना चाहते हैं. फल स्वरूप अपराधी न्यायालय से अपराध मुक्त हो जाते हैं.
इस बैठक को लेकर निश्चित रूप से कहीं न कहीं आम लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है. दूसरी ओर अधिवक्ता संघ के सचिव विजय कुमार झा ने कहा कि इस बैठक में संघ को सूचित नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिये गये. आम लोगों के हित में इस प्रकार के दिशा निर्देश दस्तावेज निर्देश बन कर नहीं रह जाय.
श्री झा ने कहा कि आम लोगों को इसका सही-सही लाभ मिलना आवश्यक है. इसके लिए धरातल पर बड़े पैमाने पर जागरूकता की जरूरत है. ताकि न्यायालय द्वारा गवाहों पर अनावश्यक रूप से वारंट जारी नहीं किया जाय. वारंट जारी किए जाने से गवाहों पर पुलिसया शोषण भी शुरू हो जाती है. फल स्वरूप गवाह को यह लगता है कि उसका नाम किस वजह से डाल दिया गया और वह स्वयं को पुलिस के गिरफ्त से बचाने का प्रयास करता है.
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