दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल हुए कई वैज्ञानिक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Apr 2019 4:51 AM (IST)
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मुंगेर : एमयू स्थापना पखवारा के अवसर पर बुधवार से इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसियेशन पटना एवं मुंगेर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. जिसका विषय-भविष्य का भारत, विज्ञान एवं प्राद्योगिकी है. सेमिनार का उद्घाटन बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने दीप जलाकर किया. मुख्य […]
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मुंगेर : एमयू स्थापना पखवारा के अवसर पर बुधवार से इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसियेशन पटना एवं मुंगेर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. जिसका विषय-भविष्य का भारत, विज्ञान एवं प्राद्योगिकी है. सेमिनार का उद्घाटन बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने दीप जलाकर किया.
मुख्य अतिथि के रूप में इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसियेशन के वर्ष 2020-21 के निर्वाचित अध्यक्ष विजयालक्ष्मी सक्सेना, पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार सक्सेना, वर्तमान अध्यक्ष मनोज कुमार चक्रवर्ती, भाभा परमाणु अनुसंधान के वैज्ञानिक डा़ ध्रुव कुमार, आइआइटी बाम्बे के प्रो़ अनिल कुमार, प्रो़ धर्मेंद्र कुमार, मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति डा़ रणजीत कुमार वर्मा, प्रतिकुलपति डा़ कुसुम कुमार उपस्थित थे. कार्यक्रम में विषय प्रवेश प्रो़ गोपाल प्रसाद चौधरी एवं मंच संचालन डा़ शाहिद रजा जमाल ने किया.
सवामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि मुंगेर विश्वविद्यालय का स्लोगन नास्ति, ज्ञानार्थ सर्वेभू हो. जिसका अर्थ है कि विज्ञान का महत्व भौतिक विकास नहीं होता है. बल्कि विज्ञान का अर्थ ज्ञान के साथ अपनी मानव संवेदनाओं को जागृत करना होता है.
तभी किसी भी मनुष्य के भौतिक ज्ञान के साथ उसके आत्मा का विकास संभव है. जीवन में शिक्षा, विद्या और ज्ञान तीन ऐसे प्रकार हैं. जिससे मनुष्य अपने क्षमताओं की सीमाओं से आगे जा सकता है.
जैसे शिक्षा हमे विज्ञान की सही परिभाषा को समझने में मदद करता है. जिसके बाद हमारे द्वारा प्राप्त शिक्षा विद्या का रूप लेती है. जो हमें ज्ञान की ओर अग्रसर करता है. जब हम अपनी ज्ञान की सीमाओं के पार अपनी क्षमताओं को ले जाते हैं.
तब हम ज्ञानी बनने की ओर बढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि 2017 में विश्व के दो सबसे बड़े विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड एवं कैंब्रिज में खुश कैसे रहें विषय के लिये दो सत्र चलाये गये थे. जिसका उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि जीवन में शिक्षा महत्वपूर्ण है.
लेकिन हम उससे संतुष्ट होकर खुश कैसे रहें यह ज्यादा महत्वपूर्ण है. आज लोग मानवीय संवेदनाओं से दूर होते जा रहे हैं. मुंगेर विश्वविद्यालय से मेरी अपेक्षा है कि वह मुंगेर के छात्र-छात्राओं को शिक्षा और ज्ञान के साथ जीवन की संवेदनाओं को समझने का ज्ञान भी दें.
विजयालक्ष्मी सक्सेना ने कहा कि आज देश के हरेक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी है. लेकिन फिर भी हमारा देश विश्व में महिलाओं के लिये वर्ल्ड मोस्ट डेंजरस देश में सबसे आगे है.
जो हमारे लिये शर्मिंदी की बात है. जबकि आज कई महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में देश का नाम रौशन कर रही है. कार्यक्रम में अन्य अतिथियों ने भी अपने-अपने विचार रखे.
वहीं गुरुवार के कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों द्वारा विज्ञान के कई विषयों पर चर्चा की जायेगी. मौके पर कॉलेज निरीक्षक भवेश चंद्र पांडेय, डीएसडब्लू डा़ कमल किशोर सिन्हा, प्रॉक्टर डा़ संजय कुमार, पीआरओ डा़ सूरज कोनार, नोडल पदाधिकारी डा़ अमर कुमार सहित विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी एवं कॉलेज के छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
अपनी कल्पनाओं को विज्ञान का रूप दें विद्यार्थी
कार्यक्रम में इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के वैज्ञानिकों ने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं में कल्पना करने की क्षमता होती है. जिसका इस्तेमाल सभी विद्यार्थी विज्ञान के लिये करें क्योंकि एक छोटा सा प्रयोग भी देश की तरक्की के लिये उतना ही आवश्यक है. जितना की देश के बड़े वैज्ञानिकों द्वारा किया गया प्रयोग है.
आज देश में कई ऐसे युवा वैज्ञानिक हैं. जो अपनी विज्ञान की कल्पनाओं की उड़ान को देश के प्रगति में कर रहे हैं. इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन इन सभी युवा वैज्ञानिकों को प्रतिवर्ष सम्मानित भी करता है. आज हमारा देश सबसे युवा देशों की गिनती में आता है.
जहां के युवा तकनीकी क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं. आज के युवा वैज्ञानिकों के सहयोग से ही देश न केवल जमीनी स्तर पर अपनी सुरक्षा को मजबूत कर पाया है बल्कि अंतरिक्ष में भी अपनी सुरक्षा को मजबूत करने वाले देशों में अपना नाम दर्ज कराया है.
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