पूर्णिया विवि का कारनामा, साढ़े तीन महीने पहले मृत लिपिक का कर दिया ट्रांसफर
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 10 Jun 2026 11:14 AM
डीएस कॉलेज कटिहार
Purnia University Controversy: पूर्णिया विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा और बेहद हास्यास्पद सवालिया निशान खड़ा हो गया है. नए स्वीकृत डिग्री कॉलेजों में काम सुचारू करने की जल्दबाजी में विश्वविद्यालय प्रशासन ने डीएस कॉलेज कटिहार के एक ऐसे लिपिक का प्रतिनियोजन गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज कुरसेला कर दिया, जिनका साढ़े तीन महीने पहले ही निधन हो चुका है.
कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट
Purnia University Controversy: बिहार के पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रबंधन की एक अत्यंत गंभीर और हैरान कर देने वाली लापरवाही सामने आई है. राज्य सरकार द्वारा प्रखंड स्तर पर खोले गए नए डिग्री कॉलेजों में प्रशासनिक कार्यों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए विश्वविद्यालय ने अंगीभूत कॉलेजों के कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की एक सूची जारी की. 9 जून 2026 की देर रात कुलसचिव के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में डीएस कॉलेज, कटिहार में कार्यरत निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) सुधीर रमाणी का नाम भी शामिल है, जिन्हें राजकीय डिग्री कॉलेज, कुरसेला में पदस्थापित किया गया है. इस आदेश की सबसे चौंकाने वाली हकीकत यह है कि सुधीर रमाणी का निधन साढ़े तीन महीने पूर्व ही हो चुका है. विवि प्रशासन की इस हड़बड़ी और बिना जांचे-परखे पत्र जारी करने की ढीली कार्यशैली की चर्चा अब पूरे शिक्षा जगत में हो रही है.
24 मार्च को हुई थी मौत; अनुकंपा की सुध नहीं, पर ट्रांसफर लेटर तैयार
- साढ़े तीन महीने पहले निधन: डीएस कॉलेज के कर्मचारियों ने बताया कि एलडीसी सुधीर रमाणी की मृत्यु 24 मार्च 2026 को ही हो गई थी.
- आदेश में त्वरित योगदान का निर्देश: विवि की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में मृतक सहित सभी स्थानांतरित कर्मियों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अविलंब अपने नए प्रतिनियुक्ति स्थल पर जाकर योगदान (ज्वाइनिंग) समर्पित करें.
- परिजनों को नहीं मिला लाभ: कर्मचारियों ने रोष जताते हुए कहा कि विवि ने मृत कर्मचारी के आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी देने या अन्य देय लाभ (टीबीएस) देने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की, लेकिन मरणोपरांत उनका ट्रांसफर करने में तत्परता दिखा दी.
केबी झा और डीएस कॉलेज के इन कर्मचारियों का भी हुआ प्रतिनियोजन
| वर्तमान कॉलेज का नाम | स्थानांतरित कर्मचारी का नाम | पद का नाम | नया प्रतिनियोजन स्थल (कॉलेज) |
| डीएस कॉलेज, कटिहार | सुधीर रमाणी (मृत) | निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) | गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, कुरसेला |
| शंभू कुमार यादव | रूटीन क्लर्क | गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, कोढ़ा | |
| अमर प्रताप सिंह | निम्नवर्गीय लिपिक | अनुमंडल सरकारी डिग्री कॉलेज, बायसी (पूर्णिया) | |
| केबी झा कॉलेज, कटिहार | वंशीधर झा | ऑफिस अटेंडेंट | गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, भरगामा |
| आशीष आनंद | निम्नवर्गीय लिपिक (LDC) | गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, डंडखोरा | |
| नवीन कुमार झा | ऑफिस अटेंडेंट | गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, अमदाबाद |
“जल्दबाजी में हुई चूक, जारी होगा शुद्धिपत्र”
कुलसचिव, प्रो. अखिलेश राय
लिपिकीय त्रुटि का हवाला: इस पूरे मामले पर मचे हंगामे और किरकिरी के बाद पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) प्रो. अखिलेश राय ने अपनी प्रशासनिक चूक स्वीकार की है.
उन्होंने इस संबंध में पक्ष रखते हुए कहा कि प्रखंडों में नए स्थापित डिग्री कॉलेजों की संस्थागत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुलपति के निर्देश पर संबंधित सेक्शन से सभी कर्मचारियों की अद्यतन सूची मांगी गई थी. संबंधित पटल (सेक्शन) द्वारा मृत कर्मचारी का नाम सूची से न हटाया जाना एक बड़ी गलती है. यह मामला अब संज्ञान में आ चुका है और इस तकनीकी त्रुटि को सुधारने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बहुत जल्द एक आधिकारिक शुद्धिपत्र जारी किया जाएगा.
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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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