शराबबंदी के बाद खोला ढाबा, घर में लौटीं खुशियां

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2017 4:06 AM

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कटिहार : कटिहार जिले में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके यहां शराबबंदी के बाद घर में खुशियां लौट आयी हैं. वैसे लोगों का परिवार अब दूसरों को भी खुशहाल दिखने लगा है. शराबबंदी के पूर्व जिन घरों में रोज कलह होता था, मारपीट, गाली-गलौज होती थी, वहां अब शांति दिख रही है. शराब से बचने […]

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कटिहार : कटिहार जिले में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके यहां शराबबंदी के बाद घर में खुशियां लौट आयी हैं. वैसे लोगों का परिवार अब दूसरों को भी खुशहाल दिखने लगा है. शराबबंदी के पूर्व जिन घरों में रोज कलह होता था, मारपीट, गाली-गलौज होती थी, वहां अब शांति दिख रही है. शराब से बचने वाले रुपये सब्जी, दूध, बच्चों की स्कूल फीस आदि में खर्च हो रहे हैं.

एक परिवार है डंडखोरा प्रखंड के बंका टोला निवासी तल्लू हांसदा का. तल्लू हांसदा शराबबंदी से पहले शराब के नशे में डूबा रहता था. रोज शराब पीकर घर आना, पत्नी व बच्चों के साथ गाली-गलौज, मारपीट करना उसकी दिनचर्या बन गयी थी. लेकिन, शराबबंदी के बाद जब शराब से छुटकारा मिला, तो उसके घर की आबोहवा ही बदल गयी. तल्लू की पत्नी लीलमुनि बताती है कि शराबबंदी के बाद हम दोनों पति-पत्नी ने चाय, नाश्ता, भोजन का छोटा-सा ढाबा सड़क किनारे खोल लिया है.
सुबह से रात तक उसी से हमें फुर्सत नहीं मिलती है. ठीक-ठाक कमाई भी हो जाती है. घर के खर्च के अलावा कुछ बचत भी हो जाती है. अब दो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर का खर्च इसी ढाबे से आराम से चल रहा है. अब कोई किचकिच भी नहीं होती है. तल्लू हांसदा की पत्नी लीलमुनि कहती है कि बच्चों को पढ़ा-लिखा कर बड़ा आदमी बनायेंगे. एक तो अपने ढाबे से छुट्टी नहीं मिलती, फिर भी अब यदि कहीं बाहर जाते हैं, तो लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं. कुछ लोग तो मेरे ही ढाबे में नियमित खाना खाते हैं. ये सब अच्छा लगता है.
गांव का भी बदला माहौल
बता दें कि तल्लू हांसदा व पत्नी लीलमुनि जिस समुदाय से आते हैं, उस समुदाय के लोग बताते हैं कि शराब उनके यहां पूजा में काम आता था. इतना ही नहीं, इस परिवार की देखा-देखी कई लोगों ने इस गांव में शराब से धीरे-धीरे तोबा कर ली. लगभग डेढ़ सौ लोगों की आबादी वाले इस गांव में अब लोग शराब के नाम से भी चिढ़ते हैं. गांव के लोग यदि किसी को शराब के नशे में देखते हैं, तो पहले समझाते हैं और नहीं मानने पर पुलिस के पास पकड़ कर ले जाते हैं. पहले ऐसा नहीं था. लोग एक-दूसरे को कोसते जरूर थे, लेकिन कोई किसी को समझाता नहीं था. घर में या गांव में शराब के नशे में मारपीट होती थी, तो सुबह में आरोपित व्यक्ति आगे से शराब नहीं पीने की कसम खाता था, लेकिन शाम ढलते ही कसम भूल कर फिर शराब के नशे में हंगामा करने लगता था.
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