जेल में कैदियों से वसूली जाती है रंगदारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Sep 2017 4:03 AM

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कटिहार : कटिहार मंडल कारा इन दिनों काफी चर्चे में है. बीते शनिवार को मंडल कारा से वायरल हुए वीडियो ने मंडल कारा व उसमें तैनात कर्मियों की पोल खोल कर रख दी है. वायरल वीडियों के आलोक में राज्य सरकार के निर्देश पर डीआइजी जेल नीरज झा सोमवार को कटिहार मंडल कारा पहुंचे व […]

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कटिहार : कटिहार मंडल कारा इन दिनों काफी चर्चे में है. बीते शनिवार को मंडल कारा से वायरल हुए वीडियो ने मंडल कारा व उसमें तैनात कर्मियों की पोल खोल कर रख दी है. वायरल वीडियों के आलोक में राज्य सरकार के निर्देश पर डीआइजी जेल नीरज झा सोमवार को कटिहार मंडल कारा पहुंचे व सघन चेकिंग की. साथ ही वायरल हुए वीडियो को लेकर विचाराधीन कैदियों सहित कई सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की. वीडियो वायरल मामले की जांच के दायरे में कटिहार जेल सुपरीटेंडेंट से लेकर कई कर्मी तक आ सकते हैं. इन दिनों मंडल कारा की स्थिति बद से बदतर हो गयी है.

आये दिन वहां से कैदी के परिजन से रंगदारी की मांग की जाती है. परिजनों की ओर से असमर्थता जताये जाने पर उसकी पिटायी की जाती है. और यह सभी कहीं न कहीं कारा प्रशासन की मिलीभगत से होता है.

दबंग कैदियों की बोलती है तूती : मंडल कारा में दंबग कैदियों की दिन होली की तरह व रात दीपावली की तरह मनती है. ऐसी कौन सुविधा है जो कारा में मुहैया नहीं करायी जाती है. बीते माह पूर्व मंडल कारा से बाहर आये एक कैदी सौरभ ठाकुर ने जेल सुपरीटेंडेंट पर ही आरोप लगाते हुए कहा था कि उसे पांच हजार में एक मोबाइल उपलब्ध कराया गया था,
जिससे वहां की कुव्यवस्था का एक वीडियो वायरल किया गया था. इसे लेकर कारा सुपरीटेंडेट ने सौरभ ठाकुर के विरुद्ध सहायक थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. जेल में सभी सामान उपलब्ध होते हैं इस बात की पुष्टि इससे होती है कि बीते माह पूर्व एसडीपीओ कटिहार लाल बाबू यादव व तत्कालीन एसडीओ सुभाष प्रसाद ने छापेमारी कर मंडल कारा में शराब बरामद किया था.
ऑनलाइन रहते हैं अपराधी : जहां एक ओर जेल में मोबाइल पर सख्त पाबंदी है. जब कैदी को मंडल कारा भेजा जाता है तो उसके एक एक समान यहां तक कि उसकी पुरी तरह से शारीरिक जांच की जाती है. बावजूद मंडल कारा में बंद कैदी फैसबुक व व्हाटसएप्प पर ऑनलाईन रहते हैं. कई बार इसकी शिकायत तथा फोन से कैदी के परिजनों को धमकी का मामला गरमाया, तो जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीओ के नेतृत्व में मंडल कारा में छापेमारी की गयी. मोबाइल भी बरामद किये गये, लेकिन इस पर रोक नहीं लगी.
वार्ड की लगती है बोली, एक वार्ड बिकता है 20 से 25 हजार में
मंडल कारा में वार्ड की बोली लगती है. एक एक वार्ड बीस से पच्चीस हजार में बिकता है. वार्ड की बोली लगाने वाले वार्ड इंचार्ज का उस वार्ड पर मालिकाना हक रहता है. उसके वार्ड में कौन आयेगा, वहां कौन रहेगा यह सभी निर्णय वार्ड इंचार्ज लेगा. मंडल कारा में लगाये गये बोली के अनुसार, वार्ड इंचार्ज मंडल कारा में बंद हुए कैदियों की भी खरीद फरोख्त करते है. मंडल कारा में आने वाला कैदी अगर उसके मुताबिक रुपये नही देता है तो उसकी पिटायी करायी जाती है. उनसे शौचालय की सफाई तक करायी जाती है. यहां तक कि उसके खान पान पर भी पूरी तरह रोक लगी रहती है.
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