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जिले की पांच पंचायतों में पाताल पहुंचा पानी

पीएचइडी विभाग के सर्वे में जिले की 15 पंचायतों में भूजल स्तर 40 से 50 फुट नीचे

पीएचइडी विभाग के सर्वे में जिले की 15 पंचायतों में भूजल स्तर 40 से 50 फुट नीचे भभुआ. कैमूर जिले के पांच क्रिटिकल जोन वाली पंचायतों में पानी का लेबल अब पाताल में जाने लगा है, जबकि लोक स्वास्थ्य प्रमंडल विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 15 पंचायतों में वाटर लेबल 40 से 50 फीट नीचे सरक चुका है. हर वर्ष की तरह इस बार भी कैमूर में लोग बूंद-बूंद पानी को लेकर जद्दोजहद कर रहे हैं. इधर, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के वाटर लेबल डेंजर होने के बाद जिले की पांच पंचायतों को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है. इसमें अधौरा प्रखंड की डुमरांवा, बडवान कला तथा दिघार पंचायत, भभुआ प्रखंड की बहुअन पंचायत और चैनपुर प्रखंड की डुमरकोन पंचायत शामिल हैं. वहां भूजल स्तर 50 फुट नीचे चला गया है. हालांकि, हलक तर करने की घंटी जिले की 40 से 50 फीट नीचे भूजल स्तर वाली 11 पंचायतों में भी बजनी शुरू हो गयी है. इसी तरह जिले की 149 पंचायतों में भूजल स्तर 30 से 40 फीट नीचे चल रहा है. फिलहाल अगर वाटर लेबल के सेफ जोन की बात करें, तो जिले की 38 पंचायतें ऐसी हैं, जहां वाटर लेबल 20 से 30 फुट नीचे चल रहा है. इसी तरह जिले की छह पंचायतों में वाटर लेबल 20 फुट नीचे होने से इन पंचायतों में पेयजल संकट की समस्या अभी काफी दूर खड़ी है. क्योंकि, सुरक्षित वाटर लेबल 20 से 30 फीट ही नीचे माना जाता है. मिलाजुला कर पहाड़ी क्षेत्र की बात करें या मैदानी क्षेत्र की, तो बूंद-बूंद पानी को लेकर हर जगह जद्दोजहद शुरू हो चुकी है. जहां तक मैदानी क्षेत्र में समस्या के गहराने की बात है, तो बड़े पैमाने पर सबमर्सिबल पंपों के चालू कर दिये जाने के बाद पेयजल स्तर से तेजी से नीचे खिसका है और जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर चार से लेकर कई जगहों पर चापाकलों से लोटा भर पानी निकालने के लिए लोग घंटों मशक्कत कर रहे हैं. = जिले का औसत भूजल स्तर दो फुट खिसका है नीचे पिछले तीन वर्षों में जिले का भूजल स्तर औसतन दो फुट नीचे खिसका है. पीएचइडी विभाग की ओर से मई माह में जारी की गयी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में जिले का औसत भूजल स्तर लगभग 30 फुट था, जो धीरे-धीरे वर्ष 2022 तक बढ़ते गया. वर्ष 2023 में जिले का औसत भूजल स्तर लगभग 31 फुट था, जो चार मई 2024 को जिले का औसत भूजल स्तर बढ़ कर लगभग 33 फुट हो चुका है. हालांकि, कुछ वर्षों से मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत पंचायती राज विभाग तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से संचालित नल-जल योजना से समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया गया है. बावजूद इसके सरकार की नल-जल योजना भी कई जगहों पर विभिन्न तकनीकी कारणों या पाइप फटने या टंकी खराब होने, बोरिंग फेल होने तथा भूजल स्तर भागने से ठप पड़ गयी है और लोगों को पानी नहीं मिल रहा है. क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता पीएचइडी इस संबंध में जब कार्यपालक अभियंता पीएचइडी अमित कुमार का कहना था कि क्रिटिकल जोन में सभी अभियंताओं को अलर्ट कर दिया गया है. हर घर नल-जल योजना की लगातार मानिटरिंग करायी जा रही है. क्रिटिकल पंचायतों में नल-जल योजना से पानी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है. सूचना पर 24 घंटे के अंदर खराब चापाकलों की मरम्मत करायी जा रही है. जहां जरूरत है, वहां राइजर पाइप लगाकर चापाकलों को दुरूस्त कराया जा रहा है. खराब नल-जल योजना को भी चालू करने के लिए कनीय अभियंताओं और मिस्त्रियों के धावा दल को गश्त करने का निर्देश दिया गया है. अधौरा प्रखंड के मुशहरवा बाबा, प्रखंड मुख्यालय समेत जहां जरूरत है, वहां टैंकर से पानी की आपूर्ति करायी जा रही है. इन्सेट जिले में अब तक 2194 चापाकलों की मरम्मत फोटो 25 भैंसलोट विद्यालय में चापाकल की मरम्मति करते मिस्त्री प्रतिनिधि भभुआ. जिले में पेयजल संकट से निबटने के लिए अब तक लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से 2194 चापाकलों की मरम्मत की गयी है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता अमित कुमार ने बताया कि जिले में कुल चापाकलों की संख्या 14 हजार 962 है. शिकायतों के आलोक में अब तक 1294 चापाकलों को ठीक कराया जा चुका है. इधर, गर्मी बढ़ने के बाद अप्रैल माह 2024 से अब तक 579 चापाकल को दुरूस्त कराया गया है. इसमें से 215 चापाकलों में राइजर पाइप लगाये गये हैं. 209 विद्यालयों के चापाकलों को भी चालू कराया गया है. इसी तरह एसटी तथा एससी टोलों के 119 खराब चापाकलों की भी मरम्मत करायी जा चुकी है. चालू सीजन में चापाकलों को दुरूस्त करने के लिए विभाग द्वारा 18 टीमों का गठन किया गया है. जहां से सूचना प्राप्त होती है, वहां जाकर विभागीय टीम चापाकलों को तत्काल ठीक करने में जुट जाती है.

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Prabhat Khabar News Desk
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