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स्कूल में नहीं है सबमर्सिबल, फिर भी शौचालय की छत पर लगी पानी टंकी

Updated at : 23 Jan 2025 9:10 PM (IST)
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स्कूल में नहीं है सबमर्सिबल, फिर भी शौचालय की छत पर लगी पानी टंकी

जिले में विद्यालय के विकास लिए सरकार द्वारा दी गयी राशि काे किस तरह से हानि पहुंचायी जा सकती है इसका जीता जागता उदाहरण जिले के अधौरा प्रखंड सहित विभिन्न विद्यालयों में शौचालय निर्माण के बाद शौचालय की छत पर रखी गये पानी के खाली टंकी बता रहे हैं.

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भभुआ नगर. जिले में विद्यालय के विकास लिए सरकार द्वारा दी गयी राशि काे किस तरह से हानि पहुंचायी जा सकती है इसका जीता जागता उदाहरण जिले के अधौरा प्रखंड सहित विभिन्न विद्यालयों में शौचालय निर्माण के बाद शौचालय की छत पर रखी गये पानी के खाली टंकी बता रहे हैं. इतना ही नहीं खाली टंकी के साथ पानी के लिए पाइप का वायरिंग भी किया गया है, लेकिन पानी नदारद है. दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा जिन विद्यालयों में सबमर्सिबल की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां भी छत पर पानी की टंकी रख दी गयी है. खास करके अधौरा प्रखंड क्षेत्र में बिजली व्यवस्था नहीं रहने व पानी का लेयर नीचे रहने के कारण विद्यालयों में सबमर्सिबल की व्यवस्था नहीं होने के बाद भी शिक्षा विभाग द्वारा कराये गये शौचालय निर्माण के बाद छत पर पानी की टंकी रख दी गयी है, इतना ही नहीं पानी की सप्लाई के लिए वायरिंग भी कर दिया गया है. लेकिन, टंकी में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं है. अगर तेज हवा का झकोरा मारे तो छत पर रखे गये पानी के टंकी गिरकर धराशायी हो जायेंगे. इसके बावजूद बगैर सबमर्सिबल वाले विद्यालय में बने शौचालय के ऊपर खाली पानी का टंकी रखा हुआ है. यानी कहें तो यह खुल्लम-खुल्ला राजस्व का नुकसान है, फिर भी अधिकारी इस पर संज्ञान नहीं ले रहे हैं. गौरतलब है कि समग्र शिक्षा अभियान द्वारा जिले के सैकड़ों विद्यालय में करोड़ों रुपये खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया गया है. शौचालय का निर्माण तो सही है, लेकिन जिन विद्यालय में सबमर्सिबल की व्यवस्था नहीं है वहां भी शौचालय निर्माण के बाद संवेदकों द्वारा लोकल कंपनी के पानी टंकी रखकर हजारों रुपये निकाल लिया गया है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है. = विभाग स्तर से बनाया गया है मॉडल एस्टीमेट इधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि विभाग स्तर से ही मॉडल एस्टीमेट बनाया गया था कि शौचालय निर्माण के बाद शौचालय की छत पर पानी की टंकी रखते हुए वायरिंग का कार्य करना है. हालांकि, विभाग द्वारा मॉडल एस्टीमेट तो बना दिया गया, लेकिन जिले के पदाधिकारी अगर इस पर विचार किये होते कि जिन विद्यालयों में सबमर्सिबल नहीं है, वहां पानी की टंकी रखना सही नहीं है तो लाखों रुपये के राजस्व की क्षति को बचाया जा सकता था. = कई जगहों पर नहीं लगी है टंकी, फिर भी राशि का भुगतान अब तक शिक्षा विभाग द्वारा कराये गये कई कामों पर भी सवालिया निशान खड़े हो चुके हैं, चाहे वह विद्यालय की मरम्मत का कार्य हो या बेंच डेस्क की सप्लाई का. इसी तरह शौचालय निर्माण के बाद छत पर रखी गयी टंकी में भी किया गया है. कई विद्यालय द्वारा तो खाली टंकी रख भी दिया गया, लेकिन कई विद्यालयों में बगैर छत पर टंकी रखे ही बिल भुगतान कर दिया गया. इसकी जांच से खुलासा हो सकता है. उदाहरण स्वरूप बड़वान विद्यालय में शौचालय निर्माण के बाद छत पर टंकी नहीं रखी गयी है, लेकिन भुगतान के लिए फाइल में छत पर टंकी रखकर संवेदक द्वारा जमा करा दिया गया है. क्या कहते हैं अफसर इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी विकास कुमार डीएन ने कहा कि अधिकतर विद्यालयों में सबमर्सिबल कराया जा रहा है, एस्टीमेट में शौचालय की छत पर टंकी रखने का प्रावधान था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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