भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की स्थिति खराब

Published at :02 Feb 2025 9:03 PM (IST)
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भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की स्थिति खराब

अनुमंडल क्षेत्र के एनएच से जुड़ी ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के प्रवेश से सड़क जर्जर होने लगी है. लेकिन, स्थानीय प्रशासन द्वारा इसे लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

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मोहनिया शहर. अनुमंडल क्षेत्र के एनएच से जुड़ी ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के प्रवेश से सड़क जर्जर होने लगी है. लेकिन, स्थानीय प्रशासन द्वारा इसे लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मालूम हो कि ग्रामीण सड़कों का निर्माण मुख्य रूप से हल्के वाहनों और स्थानीय यातायात को ध्यान में रखकर किया जाता है. इन सड़कों का आधार और निर्माण सामग्री राष्ट्रीय राजमार्गों या शहरी सड़कों की तुलना में कमजोर होते हैं. लेकिन, जब इन सड़कों पर अधिक भार वाले वाहन, जैसे रेत, गिट्टी, ईंट, सीमेंट या अन्य भारी सामानों से भरे ट्रकों का परिचालन हाेने से सड़कों की हालत तेजी से खराब हो रही है. इससे सड़कें जल्द टूट-फूट जाती हैं और चलने योग्य नहीं रह जाती और इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. एनएच दो के आस-पास के गांवों की सड़कों की हालत विशेष रूप से चिंताजनक हो गयी है. भारी वाहनों के चालक मुख्य सड़क से बचने के लिए अक्सर ग्रामीण सड़कों को शॉर्टकट मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इन सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कें टूट जाती हैं. गड्ढे बन जाते हैं और धूल-मिट्टी का स्तर बढ़ जाता है, जिसका ताजा उदाहरण कुदरा प्रखंड के गजराड़ी के पास बने आरओबी के सड़कों को देखा जा सकता है. जहा सड़क पूरी तरह जर्जर हो गयी है और सड़क पर धूल उड़ रहा है. जबकि इस सड़क से प्रतिदिन लगातार भारी वाहन गुजरते हैं, लेकिन कोई देखने वाले नहीं है. जर्जर सड़क न केवल वाहनों की गति धीमी कर देती है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिये यह स्थिति बहुत कठिन हो जाती है, खासतौर पर उन छात्रों और बुजुर्गों के लिए जिन्हें प्रतिदिन इन्ही सड़कों पर यात्रा करनी पड़ती है. सड़कों के खराब होने का असर केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आर्थिक समस्याएं भी पैदा करता है. किसानों और छोटे व्यापारियों को अपने उत्पाद और सामान बाजार तक ले जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका परिवहन खर्च बढ़ जाता है. इसके अतिरिक्त चिकित्सा आपात स्थितियों में भी खराब सड़कें एक बड़ी बाधा बन जाती हैं. इस समस्या का समाधान स्थानीय प्रशासन की सक्रियता से संभव है. प्रशासन को चाहिए कि वह अधिक भार वाले वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगाए और नियमों का पालन न करने वालों पर भारी जुर्माना वसूले. सड़कों पर नियमित निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी दल का गठन किया जाना चाहिए, जो इन सड़कों पर भारी वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखे. इसके अलावा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए त्वरित योजना बनायी जानी चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके. ग्रामीण लोगों को भी इस दिशा में जागरूक होना होगा और उन्हें यह समझना होगा कि सड़कों का सही रखरखाव उनकी सामाजिक और आर्थिक भलाई के लिए आवश्यक है. यदि वे प्रशासन को समय पर सूचित करें और नियमों का पालन करें, तो इन ग्रामीण सड़कों की हालत में सुधार संभव है.

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