= 10–20 साल पुरानी दीवार पर ऊपर से जुड़ाई, लाखों खर्च कर दिखाया जा रहा विकास = गिरने के कगार पर खड़ी दीवारें, हादसे का बना खतरा विभागीय निर्देश पर उठे सवाल, जांच की चेतावनी भभुआ नगर. शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बनी हुइ्र है. 10 से 20 वर्ष पहले बनी विद्यालयों की बाउंड्रीवॉल, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, उन्हें तोड़कर नयी बाउंड्रीवॉल बनाने के बजाय ऊपर से मात्र दो फुट ऊंचाई जोड़कर रंगरोगन कर कार्य पूर्ण दिखाया जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस कार्य में लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, जबकि पुरानी दीवारें खुद ही गिरने की स्थिति में हैं. यह स्थिति केवल एक दो विद्यालयों तक सीमित नहीं है. जिले के दर्जनों सरकारी विद्यालयों में यही हाल देखने को मिल रहा है. कई विद्यालयों की बाउंड्रीवॉल में दरारें पड़ चुकी हैं. कहीं ईंटें बाहर निकल आयी हैं, तो कहीं नींव कमजोर हो चुकी है. इसके बावजूद पुरानी दीवार को तोड़े बिना उसी के ऊपर नयी परत जोड़ दी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ठीक वैसा ही है, जैसे लंगड़े पैर पर क्विंटल का बोझ रख दिया जाये. सबसे गंभीर बात यह है कि इन जर्जर दीवारों के आसपास प्रतिदिन सैकड़ों छात्र छात्राएं आते जाते हैं. अगर कभी भी दीवार गिरती है तो बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है. अभिभावकों व ग्रामीणों में इसे लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है. उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता कर केवल कागजी विकास दिखाया जा रहा है. विभागीय अधिकारियों व असिस्टेंट इंजीनियर शशिकांत कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि यह कार्य विभाग से प्राप्त निर्देश के अनुसार कराया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि पुरानी बाउंड्री को पूरी तरह तोड़ने के बजाय उसी को ऊपर उठाने का आदेश मिला है, ताकि कम लागत में कार्य पूरा किया जा सके. हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब बाउंड्रीवॉल पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, तो उस पर नयी ऊंचाई जोड़ना कितना सुरक्षित व टिकाऊ है. विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर नींव पर नयी संरचना जोड़ना भविष्य में और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकता है. इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि छात्रों की जान भी जोखिम में डाली जा रही है. अब जरूरत इस बात की है कि शिक्षा विभाग पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराये और जहां बाउंड्रीवॉल पूरी तरह खराब है, वहां नयी व मजबूत दीवार का निर्माण कराया जाये. पुराने ढांचे पर अस्थायी जोड़ तोड़ कर सरकारी धन को पानी में बहाना उचित नहीं है. समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता. कहते हैं विभागीय अधिकारी.——- इस संबंध में पूछे जाने पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा अभियान विकास कुमार डीएन ने बताया कि जिले में बाउंड्रीवॉल का कार्य बीएसआइडी के माध्यम से कराया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी विद्यालय की बाउंड्रीवॉल पहले से जर्जर है और उसके ऊपर ऊंचाई बढ़ाने अथवा जुड़ाई का कार्य कराया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला है. ऐसी स्थिति में संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक तत्काल इसकी जानकारी दें, ताकि जांच करायी जा सके. डीपीओ ने यह भी स्वीकार किया कि विभागीय स्तर से बाउंड्रीवॉल के ऊपर ईंट जोड़कर उसे ऊंचा करने का निर्देश है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि जो बाउंड्रीवॉल पहले से कमजोर या क्षतिग्रस्त है, उस पर इस तरह का कार्य नियम संगत नहीं है. ऐसे मामलों में कार्रवाई की जायेगी.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

