ग्रामीण आजीविका व श्रम की गरिमा बचाने का आह्वान भभुआ शहर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा के संरक्षण को लेकर मनरेगा बचाओ संग्राम नामक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की गयी है. इस संबंध में भभुआ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस जिलाध्यक्ष राधेश्याम कुशवाहा ने कहा कि मनरेगा वर्ष 2005 में लागू किया गया. इसके तहत ग्रामीण परिवारों को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की बाध्यता है. ऐसा न होने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है. यह कानून ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ है, जिससे हर वर्ष पांच से छह करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है और ग्रामीण पलायन में कमी आती है. जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित जी राम जी अधिनियम मनरेगा की मूल भावना के विपरीत है. इससे काम की वैधानिक गारंटी समाप्त होगी, निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीयकरण होगा, पंचायतें कमजोर होंगी और मजदूरी में केंद्र का योगदान घटेगा. इसके कारण राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और श्रमिकों के अधिकार प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से मनरेगा बचाओ संग्राम के रूप में एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके. इस अवसर पर पर्यवेक्षक सुरेश मुखिया बिंद, जिलाध्यक्ष युवा कांग्रेस सूचित पांडे, संजय चौबे आदि उपस्थित रहे. कांग्रेस नेताओं ने कार्यकर्ताओं और आम जनता से भी अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत की आजीविका और श्रम की गरिमा की रक्षा के लिए यह संघर्ष आवश्यक है.
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