रामगढ़ शहर में बंदरों का आतंक, खौफ के साये में राहगीर, वन विभाग मौन

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मुख्य सड़कों व छतों पर बंदरों के झुंड का कब्जा, पूर्व में कई लोग हो चुके हैं गंभीर रूप से घायल

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मुख्य सड़कों व छतों पर बंदरों के झुंड का कब्जा, पूर्व में कई लोग हो चुके हैं गंभीर रूप से घायल रेस्क्यू नहीं होने से लगातार बढ़ रही संख्या, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगायी राहत की गुहार रामगढ़. रामगढ़ शहर सहित आसपास के कई गांवों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. छतों से लेकर बाजार की दुकानों व मुख्य सड़कों तक बंदरों का झुंड खुलेआम विचरण कर रहा है, जिससे लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं. इसके बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने से लोगों में नाराजगी है. शुक्रवार की दोपहर सूर्य मंदिर के भिंड पर ऐसा ही नजारा दिखा, जहां दर्जनों छोटे-बड़े बंदरों का झुंड मुख्य सड़क पर उछलकूद करता नजर आया. यह सड़क दुर्गा चौक से प्रखंड कार्यालय, रेफरल अस्पताल, ग्राम भारती बालिका विद्यापीठ कॉलेज, बीआरसी भवन, गोडसरा गांव व सूर्य मंदिर को जोड़ती है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों राहगीरों का आवागमन होता है. राहगीरों का कहना है कि इस रास्ते से गुजरते समय हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं बंदर हमला कर घायल न कर दें या सामान लेकर न भाग जायें. विदित हो कि करीब एक वर्ष पूर्व बाजार के स्वर्ण व्यवसायी अंजय वर्मा पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया था. जान बचाने के प्रयास में छत से कूदने के कारण उनकी दोनों एड़ियों की हड्डियां टूट गयी थीं, जिनका इलाज वाराणसी में लाखों रुपये खर्च कर कराया गया. वहीं, ग्राम भारती महाविद्यालय के समीप एक मकान की छत से बंदरों द्वारा गिरायी गयी ईंट लगने से एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे इलाज के लिए वाराणसी ट्रॉमा सेंटर ले जाना पड़ा था. इन घटनाओं के बावजूद बंदरों का व्यापक स्तर पर रेस्क्यू नहीं होने से उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. नगर के अलावा गोडसरा, ईसरी, अकोढ़ी समेत कई गांवों में भी बंदरों का जमावड़ा देखा जा रहा है. बंदर घरों में रखे सामान, दुकानों के फल व खाने-पीने की वस्तुओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं. नगरवासियों व ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व वन विभाग से जल्द बंदरों का रेस्क्यू कर लोगों को इस समस्या से राहत दिलाने की मांग की है.

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Vikash Kumar

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