कैमूर पहाड़ी पर कैमरे में एक साथ कैद हुए दो तेंदुए, टाइगर रिजर्व बनने की उम्मीदें हुईं और मजबूत

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कैमरे में एक साथ कैद दो-दो तेंदुए. फोटो – प्रभात खबर

Kaimur Tiger Reserve : कैमूर के जंगलों में जानवरों की गिनती के लिए लगाए गए 150 कैमरों में एक साथ दो तेंदुए, पैंगुलिन और धारीदार लकड़बग्घा जैसे दुर्लभ वन्यजीव कैद हुए हैं.

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विकास कुमार की रिपोर्ट:
Kaimur Tiger Reserve :
कैमूर पहाड़ी पर स्थित जंगलों से वन्यजीवों का एक बेहद अद्भुत नजारा सामने आया है. यहां तेंदुए से लेकर पैंगुलिन, भालू, धारीदार लकड़बग्घा, मोर और हिरण सहित कई तरह के दुर्लभ जंगली जानवर मौजूद हैं. इसके पुख्ता प्रमाण वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की गिनती के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरों से मिले हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि कैमूर पहाड़ी के जंगलों में एक साथ दो-दो तेंदुए कैमरे में कैद हुए हैं.

दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित बसेरा बना कैमूर सेंचुरी

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद यह साबित हो गया है कि कैमूर का पूरा सेंचुरी क्षेत्र दुर्लभ और अनेक प्रकार के जंगली जानवरों का सुरक्षित बसेरा है. पैंगुलिन जैसे अत्यंत दुर्लभ जीव की विस्तृत जानकारी और उनकी सही संख्या का पता लगाने के लिए वन विभाग द्वारा जंगल में अभी और कैमरे लगाए जा रहे हैं.

कैमरे में कैद धारीदार लकड़बग्घा

दो फेज में लगाए गए थे 150 कैमरे

दरअसल, कैमूर पहाड़ी के पूरे सेंचुरी क्षेत्र में जंगली जानवरों की गतिविधि और उनकी वास्तविक संख्या जानने के लिए कुल 150 विशेष कैमरे लगाए गए थे. दिन-रात 24 घंटे काम करने वाले इन कैमरों को 28-28 दिनों के लिए दो अलग-अलग फेज में लगाया गया था.

एक ही फ्रेम में दिखे दो तेंदुए

इसी दौरान 13 मार्च 2026 को रात के ठीक 8:20 बजे कैमरे में एक साथ दो तेंदुए चहलकदमी करते हुए कैद हो गए. इनके अलावा पैंगुलिन और धारीदार लकड़बग्घा जैसे संकटग्रस्त वन्यजीवों की तस्वीरें भी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं.

कैमरे में कैद मोर

वाल्मीकि नगर की तर्ज पर कैमूर को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया तेज

कैमूर पहाड़ी सेंचुरी क्षेत्र को पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि नगर की तर्ज पर ‘टाइगर रिजर्व’ घोषित करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. बिहार सरकार के कैबिनेट से कैमूर पहाड़ी पर टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है. इसके बाद केंद्र सरकार से अंतिम एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) और मंजूरी के लिए वन विभाग की ओर से पत्र भेजा गया है.

दुर्लभ वन्यजीवों के मिलने से महत्व और बढ़ा

केंद्र से हरी झंडी मिलते ही इस क्षेत्र को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया जाएगा. इस प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच, जंगलों में इतने बड़े पैमाने पर दुर्लभ वन्यजीवों के मिलने से कैमूर के जंगलों का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है.

कैमरे में कैद तेंदुआ

डब्ल्यूआईआई (WII) को भेजी गई फुटेज, जल्द आएगी रिपोर्ट: डीएफओ

जिला वन एवं प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) संजीव रंजन ने बताया कि वन्यजीवों की गणना के लिए कैमूर पहाड़ी पर दो फेज में 28-28 दिनों के लिए 150 कैमरे लगाए गए थे. इन कैमरों में एक साथ दो तेंदुए, पैंगुलिन, भालू, धारीदार लकड़बग्घा, मोर, हिरण और सांभर सहित कई अन्य वन्यजीव कैद हुए हैं.

भारतीय वन्यजीव संस्थान करेगा डेटा का अध्ययन

इन सभी कैमरों के फुटेज और तस्वीरों को विस्तृत अध्ययन और सटीक गिनती के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) को भेज दिया गया है. संस्थान द्वारा डेटा की पूरी जांच के बाद रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिससे पता चलेगा कि कैमूर पहाड़ी पर किस जंगली जानवर की वास्तविक संख्या कितनी है.

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सूर्यकांत कुमार

लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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