अधिकारियों की बेरुखी से कई मुहल्लों में जवाब देने लगे हैंडपंप, नलजल का भी बुरा हाल

गर्मी का मौसम अभी शुरू नहीं हुआ है और ना ही गर्मी अपने शबाब पर आयी है कि इधर भभुआ शहर के अधिकतर मुहल्लों में और मुख्य सड़कों के आसपास लगे हैंडपंप जवाब देने लगे हैं
फोटो.06.तीन माह से बंद पड़े सदर थाने के सामने चापाकल गर्मी शुरू होने से पहले ही शहर में पेयजल संकट =कई वार्डों में हुए बंद, तो कई हो चुके है मरम्मत के अभाव में ठप खराब हैंडपंप व बदहाल नल-जल योजना ने बढ़ायी लोगों की मुसीबत नल जल की सप्लाइ भी अनियमित, प्यास बुझाने के लिए दूर जाने को मजबूर लोग सरकारी दावों की खुली पोल, 900 में से सैकड़ों हैंडपंप खराब भभुआ सदर. गर्मी का मौसम अभी शुरू नहीं हुआ है और ना ही गर्मी अपने शबाब पर आयी है कि इधर भभुआ शहर के अधिकतर मुहल्लों में और मुख्य सड़कों के आसपास लगे हैंडपंप जवाब देने लगे हैं, तो कई हमेशा के लिए ठप पड़ चुके है. कई मुहल्लों में भी हैंडपंप खराब पड़े हुए है, तो नल जल की भी हालत बेहाल है. शहर का पश्चिमी एरिया तो अभी से ही टापू बनने लगा है. खासकर कचहरी रोड के आसपास और वार्ड सात में तो हैंडपंप तो खराब है ही, नल जल की सप्लाई भी नियमित नहीं है. अब इसके चलते अधिकतर दुकानदार जयप्रकाश चौक और ब्लॉक मोड़ से पानी ला रहे है, तब जाकर उनकी प्यास बुझ रही है और अन्य घरेलू कार्य हो रहे हैं. शहर के एकता चौक निवासी अभिषेक चौरसिया ने बताया कि उनके मुहल्ले में अधिकतर हैंडपंप खराब है, लेकिन कोई बनवा नहीं रहा है. गर्मी बढ़ेगी तो काफी परेशानी होगी. शक्ति नगर के राजीव कुमार ने कहा कि मुहल्ले में कई हैंडपंप खराब हैं, लेकिन किसी को कोई चिंता नहीं है. आशीष पांडे ने कहा कि सरकारी हैंडपंप काफी दिनों से खराब है, लेकिन जवाबदेह अधिकारी मरम्मत कराने का नाम नहीं ले रहे है. रवि श्रीवास्तव ने कहा कि शहर के मुख्य मार्ग पर कई हैंडपंप खराब हैं. उनके मुहल्ले में हैंडपंप के अलावा नलजल का भी हाल बेहाल है. पानी की किल्लत है क्योंकि वाटर सप्लाई भी एक निश्चित समय पर लोगों को मिलता है, लेकिन हैंडपंप शुरू होने से ठीक होने से लोगों को सहूलियत मिल सकती है. इस पर पीएचइडी और नगरपालिका को ध्यान देने की जरूरत है. =जयप्रकाश चौक व ब्लॉक मोड़ से लाना पड़ रहा पानी दरअसल, गर्मी के सीजन के आने से पहले ही शहर में पेयजल व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब है कि शहर के व्यस्तम एकता चौक, कचहरी रोड, जेपी चौक आदि जगहों पर दुकानदारों को शहर में बिक रहे आरओ के पानी को खरीदना पड़ता है. कचहरी मुख्य द्वार के सामने लिट्टी चोखे की दुकान लगाने वाले जगदीश साह, पिंटू केशरी आदि का कहना था कि कचहरी और आसपास में गाड़े गये सभी हैंडपंप मरम्मत के अभाव में जवाब दे चुके है. अब पानी के लिए जेपी चौक या ब्लॉक मोड़ तक जाना पड़ता है और साइकिल आदि से पानी लाना पड़ रहा है. पानी की किल्लत से उनकी दुकानदारी प्रभावित हो रही है. इसलिए दुकानदारी चलाने के लिए मजबूरन शहर में बिकनेवाले आरओ का पानी खरीदते है. उनका कहना था कि कचहरी रोड में सालों से बनी आ रही पेयजल की गम्भीर समस्या को दूर करने को लेकर उनलोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर नगर पर्षद के अधिकारियों तक से गुहार लगाया, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. हाल फिलहाल ठंड के मौसम में नल जल का पानी आता था, लेकिन गर्मी शुरू होते ही वह भी बंद हो गया है. = सबमर्सिबल के भरोसे शहर के लोग दरअसल, भभुआ शहर भले ही अन्य सुविधा में बड़े शहरों की तुलना में कहीं हो, लेकिन पानी की किल्लत अब यहां भी बड़े शहरों जैसी हो गयी है. यहां की आबादी के 80 प्रतिशत लोग अभी भी चापाकल व सबमर्सिबल के पानी पर निर्भर हैं. कहने को तो शहर में 800 से ज्यादा चापाकल पीएचइडी व नगर पर्षद द्वारा लगवाये गये हैं और सभी जगहों पर नलजल का कार्य संपूर्ण कर लिया गया है. लेकिन, धरातल पर देखा जाये तो अभी भी शहर में जलापूर्ति की कोई ठोस योजना नहीं बनायी जा सकी है. इधर शहर के सार्वजनिक स्थलों पर शुद्ध पानी की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं है. प्रतिदिन विभिन्न जरूरतों के लिए हजारों लोग शहर में आते और जाते हैं. इन्हें शुद्ध पेयजल मिलने की बात तो दूर हैंडपंप का पानी तक नसीब नहीं हो रहा. ऐसे में शहर में आये लोग बोतल बंद पानी पीने को विवश हैं. =कहने को सभी चालू, पर असल में आधे खराब दरअसल, शहर की आबादी और जरूरत को देखते हुए यूं तो पीएचइडी और भभुआ नगर पर्षद ने शहर में विभिन्न स्थानों पर लगभग नौ सौ से ज्यादा हैंडपंप लगवाये है. लेकिन, इनमें कितने लगने के बाद से ही बेकार पड़े हैं यह विभाग को भी नहीं पता. इसके अलावा नगर पर्षद क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर इंडिया मार्का हैंडपंप भी लगाये गये हैं. लेकिन, मुंडेश्वरी सिनेमा हॉल, अखलासपुर बस स्टैंड के बाहर, कचहरी रोड के अलावा अधिकतर जगहों पर हैंडपंप बंद पड़े हुए है. = नलजल की व्यवस्था भी नहीं हो सका बेहतर वैसे, हैंडपंप को छोड़ हर घर नल का जल की बात करे तो अभी भी भभुआ शहर में मुख्यमंत्री के सात निश्चय की यह योजना अभी भी बेहतर नहीं हो पायी हैं. अधिकतर मुहल्लों में वाटर सप्लाई महज ख्वाब बनकर रह गयी है. जहां सप्लाई का पानी पहुंच भी रहा है वहां के लोग इसे पीने से घबराते हैं. क्योंकि उसका रंग और स्वाद स्पष्ट बताता है कि पानी प्रदूषित है. ऐसे में सेहत ठीक रखने का केवल एक ही चारा बचता है, कि खुद ही साफ पानी का प्रबंध करें या फिर बाजार में बिक रहे आरओ के पानी पर पैसे खर्च करे. = प्याऊ की स्थिति भी ठीक नही शहर में आनेवाले लोगों के प्यास बुझाने के लिए जगह-जगह प्याऊ का निर्माण कराते हुए पेयजल की व्यवस्था की गयी है. लेकिन, उदासीनता ने इसे बेकार साबित कर दिया है. शहर में स्थापित किसी प्याऊ का नल ही क्षतिग्रस्त हो चुका है, तो कहीं प्याऊ को किसी ने अपनी जागीर बना लिया है, तो कहीं प्याऊ घर का पानी स्नान व ठेले पर खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों के बर्तन धोने के काम में आ रहा है. शहर के विभिन्न विभागों व नप द्वारा लगभग 900 चापाकल लगवाये गये हैं. इन चापाकलों में अभी लगभग 250 चापाकल मरम्मत के चलते बेकार पड़े हुए हैं. इन चापाकलों की मरम्मत का दंभ भले ही विभाग भरता हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल परे है. कई जगह लगाये गये हैंडपंप का तो नामों निशान तक मिट गया है, तो कुछ औंधे मुंह पड़े हुए है.
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