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सिविल कोर्ट के कर्मचारी गये हड़ताल पर, न्यायिक कार्य बाधित

Updated at : 16 Jan 2025 9:06 PM (IST)
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सिविल कोर्ट के कर्मचारी गये हड़ताल पर, न्यायिक कार्य बाधित

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में कार्यरत तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर जाने से न्यायिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा.

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मोहनिया सदर. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में कार्यरत तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर जाने से न्यायिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा. अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर न्यायालय कर्मी अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय परिसर में धरना पर बैठ गये. न्यायिक कार्य पूरी तरह से बाधित होने के कारण अपने विभिन्न न्यायिक कार्यों को लेकर इस कड़ाके की ठंड में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मुवक्किलों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इन कर्मियों के कलमबंद हड़ताल पर जाने से पूरे दिन न्यायालय परिसर में सन्नाटा छाया रहा. अधिवक्ता भी न्यायिक कार्य नहीं होने से बैठे रहे. कर्मियों की प्रमुख मांगों में वेतन बिसंगतियों को जल्द से जल्द दूर करने, सभी तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों का शीघ्र पदोन्नति करने, शत प्रतिशत अनुकंपा पर बहाली करने के साथ विशेष न्यायिक कैडर लागू करने की मांग शामिल है. धरना पर बैठे कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पूरे दिन सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, न्यायिक कार्यावधि में लोगों की भीड़ से गुलजार रहने वाला सिविल कोर्ट परिसर न्यायालय कर्मियों के हड़ताल पर जाने से दोपहर बाद से ही वीरान हो गया. यदि इसी तरह न्यायालय कर्मियों की हड़ताल चलती रही तो न्यायिक कार्य व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा जायेगी. पुलिस द्वारा जिन व्यक्तियों को अलग- अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया है, उनको भी कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकेगा. कर्मचारियों के इस हड़ताल ने पुलिस अधिकारियों का भी सिरदर्द बढ़ा दिया है. धरना स्थल पर पहुंचे एक पुलिस अधिकारी को यह कहते हुए सुना गया कि किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे तक ही पुलिस हिरासत में रखने का प्रावधान है, लेकिन न्यायालय कर्मियों के हड़ताल पर जाने से हिरासत में लिये गये लोगों को न्यायालय में कैसे पेश किया जाये और उनको न्यायिक हिरासत में जेल कैसे भेजा जाये समझ में नहीं आ रहा है. धरना की अध्यक्षता हरेंद्र पाल ने की. संचालन करलव प्रकाश ने किया. धरने में बजेंद्र बहादुर, प्रेमचंद्र लाल, मुख्तार आलम, सचिंद्र कुमार राय सहित कई कर्मी शामिल रहे. वहीं, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भले ही न्यायालय कर्मी शांतिपूर्ण धरना में शामिल रहे, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती से पूरा सिविल कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था, साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए थाना अध्यक्ष प्रियेश प्रियदर्शी व एसडीपीओ प्रदीप कुमार भी न्यायालय पहुंचे व सुरक्षा संबंधी सभी बिंदुओं का जायजा लिया.

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