डीएम के निरीक्षण के बाद अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था सुधारने में जुटे अधिकारी

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 13 Jan 2026 4:11 PM

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जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह द्वारा अनुमंडलीय अस्पताल का निरीक्षण किये जाने के बाद सामने आयी खामियों को दूर करने व व्यवस्था में सुधार को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है.

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तीन बार अस्पताल पहुंचे सिविल सर्जन व डीपीएम, खामियां दूर करने पर जोर # अस्पताल की व्यवस्था के साथ कर्मियों के कार्यशैली में भी सुधार की है जरूरत साफ सफाई, जल निकासी व समन्वय पर विशेष ध्यान, फिर हो सकता है निरीक्षण मोहनिया शहर. जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह द्वारा अनुमंडलीय अस्पताल का निरीक्षण किये जाने के बाद सामने आयी खामियों को दूर करने व व्यवस्था में सुधार को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. डीएम के निरीक्षण के बाद अब तक तीन बार सिविल सर्जन डॉ चंदेश्वरी रजक व डीपीएम ऋषिकेश जायसवाल अनुमंडलीय अस्पताल पहुंच चुके हैं और व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं. गौरतलब है कि जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में साफ सफाई की कमी व कर्मियों के बीच आपसी समन्वय का अभाव सामने आया था. इसके साथ ही कई डॉक्टर व कर्मी अनुपस्थित पाये गये थे, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जतायी थी. इसी के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और सुधार की प्रक्रिया शुरू की गयी. अस्पताल में साफ सफाई से लेकर मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. परिसर में चारों ओर फैले कबाड़ को एकत्र कर पूरी तरह से हटाया गया है. इसके साथ ही अस्पताल के ऊपरी तल्ले से बिना पाइप के गिर रहे पानी की समस्या को भी दूर कर दिया गया है. अब वहां समुचित पाइपलाइन लगाकर जल निकासी की व्यवस्था की गयी है. अस्पताल के सभी कमरों में विशेष रूप से सफाई करायी गयी है और सामानों को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि मरीजों व उनके परिजनों को बेहतर सुविधा मिल सके. इसी बीच यह भी कयास लगाये जा रहे हैं कि एक बार फिर जिलाधिकारी द्वारा अनुमंडलीय अस्पताल का निरीक्षण किया जा सकता है. ऐसे में विभागीय अधिकारी किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाह रहे हैं. मालूम हो कि हमेशा अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहने वाले अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों व कर्मियों की कार्यशैली में भी बड़े बदलाव की जरूरत है. मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली, इलाज में लापरवाही व कर्मियों के बीच गुटबाजी जैसी शिकायतों पर भी अंकुश लगाना जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और उन्हें बेवजह किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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