कागजों पर ही चल रही हाथों की धुलाई योजना

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भभुआ नगर : सरकार द्वारा नई योजनाएं बन तो रही हैं लेकिन अधिकांश योजनाएं कागजों पर ही चल रही हैं. इन्हीं में से एक योजना है मिड डे मील बच्चों को देने से पहले उनका हाथ साबुन से धोने के लिए प्रेरित करना. इस योजना के तहत सभी स्कूलों के हेडमास्टर को निर्देश दिया गया […]

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भभुआ नगर : सरकार द्वारा नई योजनाएं बन तो रही हैं लेकिन अधिकांश योजनाएं कागजों पर ही चल रही हैं. इन्हीं में से एक योजना है मिड डे मील बच्चों को देने से पहले उनका हाथ साबुन से धोने के लिए प्रेरित करना. इस योजना के तहत सभी स्कूलों के हेडमास्टर को निर्देश दिया गया था कि बच्चों का हाथ साबुन से धुलवाने के बाद ही उन्हें मिड डे मिल दिया जाये, लेकिन योजना का क्रियान्वयन होता नहीं दिख रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई स्कूलों के शिक्षकों व बच्चों को इस योजना की जानकारी तक नहीं है.1203 स्कूलों में चल रही एमडीएम योजना: जिले के 1203 स्कूलों में एमडीएम योजना संचालित है.
39 स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेवारी एनजीओ को दी गयी है. अन्य स्कूलों में हेडमास्टरों की देखरेख में रसोइया मध्याह्न भोजन बनाता है. बच्चों को भोजन परोसे जाने से पहले हेडमास्टरों को अपनी देखरेख में बच्चों का हाथ साबुन से धुलवाना है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह योजना कागजों पर चल रही है.
खर्च का हो जाता है भुगतान: बताया जा रहा है कि हाथ धुलाई के लिए सरकार की ओर से रुपये दिये जाते हैं व स्कूलों द्वारा रुपये खर्च भी किये जा रहे हैं लेकिन बच्चों का हाथ धुलवाया नहीं जा रहा है.
स्कूलों में कहीं भी साबुन या हैंड वाश नहीं दिखता. कई स्कूलों में बच्चों को घर से लाना पड़ता है बरतन: एमडीएम योजना में गड़बड़ी के मामले आये दिन प्रकाश में आते रहते हैं. कहीं बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है, तो कई स्कूलों में बच्चों को अपने घर से मिड डे मील खाने के लिए बरतन लाना पड़ता है. कई स्कूलों के हेडमास्टरों के लिए एमडीएम योजना अतिरिक्त कमाई का जरिया बना हुआ है. इसको लेकर अक्सर विवाद होता रहता है. कई स्कूलों में बरतन चोरी की घटनाओं के बाद कई दिनों तक बच्चों को एमडीएम नहीं मिल पाता है. लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा योजनाएं लागू तो की जा रही हैं, लेकिन ठीक से मॉनीटरिंग नहीं हो पा रही है.
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