आग बुझने के बाद पहुंचेगा दमकल !

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10 पंचायत क्षेत्रों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने में होगी परेशानी 2016 में हुई हैं अगलगी की 20 घटनाएं लाखों रुपये की संपत्ति हुई बरबाद नुआंव : जिले के नुआंव प्रखंड में अकोढ़ी पुल पर बैरियर लग जाने की वजह से बड़ी गाड़ियों का परिचालन बंद हो गया है़ गरमी का […]

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10 पंचायत क्षेत्रों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने में होगी परेशानी
2016 में हुई हैं अगलगी की 20 घटनाएं
लाखों रुपये की संपत्ति हुई बरबाद
नुआंव : जिले के नुआंव प्रखंड में अकोढ़ी पुल पर बैरियर लग जाने की वजह से बड़ी गाड़ियों का परिचालन बंद हो गया है़ गरमी का दिन नजदीक आने से प्रखंड क्षेत्र में अगलगी की घटनाएं होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. विगत वर्ष भी प्रखंड क्षेत्र में 20 अगलगी की घटनाएं हुई थीं.
अब आग लगने पर अग्निशमन विभाग की गाड़ियों को प्रखंड क्षेत्र की पंचायतों में पहुंचने में 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी़ उल्लेखनीय है कि प्रखंड क्षेत्र की 10 पंचायतों के 92 गांवों के लोगों को अगलगी की घटना होने पर उन्हें बचाना मुश्किल हो जायेगा़ इससे ग्रामीण भयभीत हैं. किसानों में इसकी चिंता ज्यादा है़ खेतों व खलिहानों में अगलगी की घटना हो जाती है, तो प्रशासन को सूचना देते और अग्निशमन की गाड़ी पहुंचने में इतनी देर हो जायेगी कि आग पर काबू पाना मुश्किल हो जायेगा. उन्हें ऐसा लगने लगा है कि अब आग बुझने के बाद ही दमकल गाड़ी पहुंचेगी.
लहुरबारी होते हुए आना होगा मुख्यालय
प्रखंड क्षेत्र की 10 पंचायतें व प्रखंड मुख्यालय बैरियर के पार है. अग्निशमन की गाड़ी प्रखंड क्षेत्र में ले जाने के लिये मोहनिया से एनएच के रास्ते लहुरबारी नहर रोड से होकर प्रखंड मुख्यालय जाना होगा. गाड़ी को 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी. उक्त रोड की स्थिति भी बदहाल है़ बीते वर्षों में अगलगी की घटनाओं से वहां के स्थानीय लोगों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ था. अकोढ़ी पुल के पास कर्मनाशा नदी पर बने बैरियर से कृषि कार्य करने में भी परेशानी हो रही है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
शिक्षा व व्यापार प्रभावित होगा़ आपात स्थिति में लगनेवाली आग पर दमकल के अभाव में काबू पाना मुश्किल हो जायेगा़ नदी में डायवर्सन बन जाये, तो हर समस्या का हल निकल जायेगा.
नसीरुद्दीन अंसारी
आग लगने पर दमकल गाड़ी आने में देर हो जायेगी़ इससे आग पर काबू पाना मुश्किल हो जायेगा. प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कोई रास्ता निकालना चाहिए़
रुस्तम अली
क्या कहते हैं अधिकारी
क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण के लिए जनवरी में प्राक्कलन बना कर पुल निर्माण विभाग, पटना को भेजा गया है. प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही पुल का निर्माण किया जायेगा.
एसडीओ, पुल निर्माण विभाग
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