बदहाल जलाशयों के लौटेंगे अच्छे दिन

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मोहनिया सदर : अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके प्रखंड के जलाशयों को नया जीवन दिया जायेगा. अंचलाधिकारी ने इसके लिए पहल शुरू कर दी है. अंचल के सभी राजस्व कर्मचारियों को आदेश जारी किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की झील, चौर, आहर, पाइन, मन, ताल, तलैया, पोखर सहित अन्य जलाशयों को लेकर एक […]

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मोहनिया सदर : अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके प्रखंड के जलाशयों को नया जीवन दिया जायेगा. अंचलाधिकारी ने इसके लिए पहल शुरू कर दी है. अंचल के सभी राजस्व कर्मचारियों को आदेश जारी किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की झील, चौर, आहर, पाइन, मन, ताल, तलैया, पोखर सहित अन्य जलाशयों को लेकर एक प्रपत्र तैयार कर अविलंब सौंपी जाय. प्रपत्र एक में सभी जलाशयों के नाम व पता, प्रपत्र दो में जलाशयों का कितना अतिक्रमण हुआ है, यह लिखा होगा जबकि प्रपत्र तीन में अभियान शुरू करने का खाका होगा.

अंचल में जलाशयों की संख्या: मोहनिया अंचल में कुल जलाशयों की संख्या 443 है. इनमें से लगभग 50 प्रतिशत जलाशय अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं. इस वजह से जल के साथ ही जल निकासी की भी समस्या उत्पन्न हो गयी है. बताया जाता है कि प्रखंड के 124 में से 28 तालाबों का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है. इस योजना से इन तालाबों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है.
पर्यावरण संरक्षण एक्ट को कड़ाई से किया जायेगा लागू: भारत सरकार ने जलाशयों व पर्यावरण को बचाने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 को लागू किया, लेकिन कई जगहों पर इस कानून को गंभीरता से नहीं लिया गया. जलाशयों की अनदेखी के कारण जल संकट उत्पन्न हो गया था जिसको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ ही सभी राज्य सरकारों को आदेश जारी किया था कि सभी जलाशयों को अतिक्रमणमुक्त कराया जाय. इसको लेकर राज्य में आद्र भूमि के संरक्षण एवं विकास को गति देने तथा (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम 2010 के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है. इसकी पहली बैठक पटना में तीन अगस्त 2015 को हुई थी. इस बैठक में पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रधान सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से जलाशयों को अतिक्रमणमुक्त कराने का आदेश दिया था.
इस योजना से होंगे ये लाभ
जलाशयों के अतिक्रमणमुक्त होने से जहां पर्यावरण संतुलित हो जायेगा, वहीं, जल संकट भी दूर होगा. साथ ही उन तालाब व पोखरों में मछली पालन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा.
इस योजना से होंगे ये लाभ
जलाशयों के अतिक्रमणमुक्त होने से जहां पर्यावरण संतुलित हो जायेगा, वहीं, जल संकट भी दूर होगा. साथ ही उन तालाब व पोखरों में मछली पालन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा.
जलाशयों का अतिक्रमण कर रहे लोगों को आवास के लिए सरकार देगी पांच पांच डिसमिल जमीन
जलाशयों का अतिक्रमण कर रहे रहे गृहविहीन लोगों को सरकार की अन्यत्र घर बनाने के लिए पांच-पांच डिसमिल जमीन मुहैया करायी जायेगी. बताया गया है कि प्रपत्र दो में ऐसे लोगों की सूची तैयार की जायेगी, जो जलाशयों के किनारे रह रहे हैं. मोहनिया के अंचलाधिकारी राकेश कुमार सिंह की पहल पर अभियान बसेरा के तहत अंचल के 14 गृहविहीन लोगों को चालू वर्ष के जनवरी माह में एसडीएम शिव कुमार राउत ने पांच-पांच डिसमिल जमीन देने की मंजूरी दे दी. वहीं, बघिनी पंचायत के दसौंती गांव के 157 गृहविहीनों को चिह्नित कर इनकी सूचना बना कर अनुमंडल कार्यालय में भेजी जा चुकी है. अंचल में अभी तक 325 लोगों को चिह्नित किया जा चुका है, जिन्हें अन्यत्र घर बनाने के लिए जमीन दी जायेगी.
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