कहीं बीमार न कर दे प्रेशर हॉर्न की आवाज!
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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शोहदों की मस्ती बन रही जान पर आफत, तोड़े जा रहे नियम शहर में प्रेशर हॉर्न सहित तेज ध्वनि पर नहीं लग रही लगाम भभुआ सदर : शहर में शोर अदृश्य होते हुए भी एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है. कहें, तो ध्वनि प्रदूषण ने शहर में गंभीर समस्या का रूप धारण कर लिया […]
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शोहदों की मस्ती बन रही जान पर आफत, तोड़े जा रहे नियम
शहर में प्रेशर हॉर्न सहित तेज ध्वनि पर नहीं लग रही लगाम
भभुआ सदर : शहर में शोर अदृश्य होते हुए भी एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है. कहें, तो ध्वनि प्रदूषण ने शहर में गंभीर समस्या का रूप धारण कर लिया है. शहर में दिन-प्रतिदिन बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण यह स्थिति और ज्यादा भयानक होती जा रही है. लोग इससे अब बीमार भी पड़ रहे हैं, लेकिन तेज गति से बाइक चलानेवाले शोहदों सहित ट्रकों व बसों में बजाये जा रहे प्रेशर हॉर्न पर प्रतिबंध लगाने को लेकर किसी भी विभाग ने पहल नहीं की है.
शहर में बढ़ते निजी यात्री वाहनों विशेष कर सवारी गाड़ियों से वातावरण में जहर, तो घोला ही जा रहा है. ऊपर से बाइक सवारों में भी तेज ध्वनिवाले हॉर्न का प्रचलन आम हो गया है. गौरतलब है कि शहर में ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन जांच अभियान चला कर ट्रिपल लोडिंग, हेलमेट सहित कागजात की जांच की जाती है, लेकिन कर्कस ध्वनि वाले प्रेशर हॉर्न पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती. खासकर नौसिखिये दिन भर शहर में तेज ध्वनिवाले हॉर्न बजा के बाइक चलाते हैं. उन पर किसी की नजर नहीं जाती. तेज गति के साथ चलनेवाले इन वाहनों के हॉर्न की आवाज से कई बार बच्चे, महिलाएं, साइकिल सवार व पैदल राहगीरों को चौंक कर गिरते व दुर्घटनाग्रस्त होते देखा जा सकता है.
= जुर्माने के साथ है चालान का प्रावधान
तेज प्रेशर हॉर्न के लिए केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1999 के अनुसार, जुर्माने व चालान का प्रावधान है. इसके अनुसार, बहुस्तरीय कर्कश, विभिन्न आवाजों के तेज हॉर्न या ऐसी कोई युक्ति प्रयोग करनेवाले वाहनों पर एक हजार रुपये तक का चालान काटने का प्रावधान है. केवल कानूनत: प्लेटवाले हॉर्न ही मान्य हैं, लेकिन शहर में मानक स्तर से ऊंचे ध्वनि में प्रेशर हॉर्न बजाये जा रहे हैं.
चिड़चिड़ापन से गर्भपात तक की आशंका
सामान्य रूप से लोगों में 40 से 60 डेसिबल तक की आवाज सुनने की क्षमता होती है. इससे तीव्र आवाज के कारण व्यक्ति की सुनने की क्षमता में कमी होने के साथ कान का परदा फट सकता है.
इसके अलावा चक्कर आने, ब्लडप्रेशर बढ़ने के साथ ही छोटे बच्चों में बहरेपन आने से सामाजिक परेशानी बढ़ सकती है. लोगों में अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक परेशानी के साथ-साथ चिड़चिड़ापन तक आ सकता है, हालांकि, पीड़ित व्यक्ति इसे समझ नहीं पाता, लेकिन इसका मूल तेज ध्वनि ही है. तेज आवाज के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि तेज आवाज के कारण गर्भवती स्त्री के व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ सकता है.
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