मोह के त्याग से होता है पाप का लोप : जीयर स्वामी
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मोहनिया (नगर) : प्रखंड के पकड़ीहार में चतुर्मास ज्ञान व्रत पर श्री जीयर स्वामी ने बताया कि जगत व जगत की वस्तु व जगत के व्यवहार से मोह को त्याग कर वैराग्य अपनाने से पाप का लोप हो जाता है और मनुष्य मुक्त हो जाता है. पाप लोहे की हथकड़ी है, तो पुण्य सोने की. […]
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मोहनिया (नगर) : प्रखंड के पकड़ीहार में चतुर्मास ज्ञान व्रत पर श्री जीयर स्वामी ने बताया कि जगत व जगत की वस्तु व जगत के व्यवहार से मोह को त्याग कर वैराग्य अपनाने से पाप का लोप हो जाता है और मनुष्य मुक्त हो जाता है. पाप लोहे की हथकड़ी है, तो पुण्य सोने की.
पाप कर्म से निकृष्ट योनि में जन्म होता है व पुण्य करने से स्वर्ग होता है. मनुष्य को उसके पुण्य से ही स्वर्ग प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि परमात्मा का सहयोग या उसके मिलने का नाम ही योग है. एक कर्म के फल को व कर्म की भावना को यदि भगवान को समर्पित किया जाये, तो उसका प्रभाव मनुष्य पर नहीं पड़ता है. यही कर्म का प्रभाव यही त्याग तपस्या है.
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