बाढ़ व बारिश के कहर से साढ़े आठ हजार एकड़ फसल बरबाद
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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इस वर्ष जुलाई और अगस्त माह में हुई जबरदस्त बारिश ने जहां एक ओर किसानों को राहत पहुंचायी, वहीं दूसरी ओर जिले के कई प्रखंड क्षेत्रों में धान की फसल जलजमाव और बाढ़ से प्रभावित हुई है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 8415.30 एकड़ में लगी धान की फसल नष्ट हुई है. भभुआ(नगर) : […]
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इस वर्ष जुलाई और अगस्त माह में हुई जबरदस्त बारिश ने जहां एक ओर किसानों को राहत पहुंचायी, वहीं दूसरी ओर जिले के कई प्रखंड क्षेत्रों में धान की फसल जलजमाव और बाढ़ से प्रभावित हुई है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 8415.30 एकड़ में लगी धान की फसल नष्ट हुई है.
भभुआ(नगर) : प्रकृति जब विकराल रूप धारण करती है, तो इसका नुकसान भी लोगों को भुगतना पड़ता है. प्राकृतिक आपदा की मार से हर वर्ष किसानों का कुछ न कुछ नुकसान जरूर होता है. इस साल बारिश से हुए नुकसान की बात करे, तो जिले में भारी बारिश व बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है.
आर्थिक नुकसान के अलावा शारीरिक व मानसिक रूप से भी किसान काफी हद तक प्रभावित हुए हैं. कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष खरीफ सीजन में बाढ़ व बारिश की वजह से कुल 8415.30 एकड़ में लगी फसल के नष्ट होने का अनुमान है. गौरतलब है कि जिले में इस वर्ष एक लाख आठ हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. अब ऐसे में बाढ़ व बारिश से हुई फसल की क्षति के बाद उत्पादन के लक्ष्य में भी कमी आने के पूरे आसार दिख रहे हैं. जिले के रामगढ़ प्रखंड क्षेत्र में सबसे ज्यादा इस वर्ष बाढ़ का प्रभाव रहा जहां एक ओर बाढ़ से प्रखंड क्षेत्र के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए. वहीं इस क्षेत्र में 2778 एकड़ में लगी फसल भी बरबाद हुई है. अधौरा में जहां कोई नुकसान नहीं पहुंचा वहीं मैदानी क्षेत्र में सबसे कम भगवानपुर में 20.5 तो चांद में 29 एकड़ में धान की खड़ी फसल बरबाद हुई है.
कई लोग हुए बेघर : बाढ़ व बारिश से खेती किसानी ही नहीं बल्कि कई लोगों के आशियाने भी उजड़ चुके हैं. जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सहायता के लिए तत्पर दिखा लेकिन अभी भी जिन जगहों पर बाढ़ का प्रभाव ज्यादा रहा वहां के लोगों की सामान्य जीवनशैली अब तक पटरी पर नहीं आयी है. हालांकि, बाढ़ व बारिश से क्षतिग्रस्त हुए मकानों का सर्वे कराने का आदेश डीएम द्वारा दिया गया है. लेकिन इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं बन पायी है. क्षतिग्रस्त हुए मकानों की सर्वे रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जायेगी. जिसके बाद नियमानुसार प्रभावित लोगों को सहायता मुहैया करायी जायेगी.
फसल बीमा पर टिकी आस
प्राकृतिक के कहर के बाद किसानों की नजरें केंद्र व राज्य सरकार की ओर टिकी है. एक ओर इस वर्ष प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को राहत पहुंचा सकता है वहीं दूसरी ओर फार्म भरने की समय अवधि कम होने से बहुत सारे किसान बीमा योजना से वंचित रह गये.
गौरतलब है कि जिले में कुल किसानों की संख्या एक लाख 91 हजार सौ है. जिनमें 12 हजार केसीसी ऋणधारी है. मगर कम समय और जटिल प्रक्रिया की वजह से 25 फीसदी किसानों को ही इसका लाभ मिल सका है. विभिन्न बैंकों को मिला कर फसल बीमा योजना के अंतर्गत ऋणी और गैर ऋणी 44 हजार से अधिक किसानों का ही बीमा हो सका है. अब ऐसे में जिन किसानों ने फसल बीमा हेतु आवेदन दिया है उन्हें थोड़ी बहुत राहत मिलने की उम्मीद नजर आ रही है.
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