बिना हेडमास्टर के चल रहे जिले के 63 हाइस्कूल

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विगत वर्षों में अपग्रेड किये गये 40 स्कूलों में अब तक नहीं हुई हेडमास्टरों की नियुक्ति भभुआ (नगर) : झंधार में फंसे नाव को निकालने में एक नाविक की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. ठीक उसी प्रकार हर संस्थान को चलाने के लिए एक प्रतिनिधि की जरूरत होती है. यह बात स्कूलों में भी लागू होती […]

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विगत वर्षों में अपग्रेड किये गये 40 स्कूलों में अब तक नहीं हुई हेडमास्टरों की नियुक्ति

भभुआ (नगर) : झंधार में फंसे नाव को निकालने में एक नाविक की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. ठीक उसी प्रकार हर संस्थान को चलाने के लिए एक प्रतिनिधि की जरूरत होती है. यह बात स्कूलों में भी लागू होती है. लेकिन, जिले के हाइस्कूलों की मौजूदा स्थिति देखी जाये, तो कुल 85 हाइस्कूलों में से 63 हाइस्कूलों में हेडमास्टर है ही नहीं.
अब सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में पठन-पाठन की स्थिति और स्कूल चलाने के लिए बनाये गये नियमों का कितना पालन होता होगा. गौर करने लायक बात यह है कि विगत वर्षों में मैट्रिक व इंटर की पढ़ाई की सुविधा ग्रामीण स्तर तक सुलभ कराने के लिए जिले के 40 मीडिल स्कूलों को अपग्रेड कर प्लस टू स्कूल का दर्जा तो दे दिया गया. लेकिन, मूलभूत संसाधन टीचरों का अभाव व यहां तक स्कूल को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले हेडमास्टरों की बहाली अब तक नहीं की जा सकी.
हेडमास्टर लगाते रहते हैं दौड़
जिन स्कूलों में हेडमास्टर की नियुक्ति नहीं है, वहां स्कूल के किसी शिक्षक को प्रभार दे दिया गया है. इतना ही नहीं जिन स्कूलों में एचएम हैं भी उन्हें भी चैन नहीं. आये दिन होनेवाली विभाग की बैठकों को लेकर हेडमास्टर जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक का चक्कर लगाते रहते हैं. इतना ही नहीं स्कूल में चल रही विभिन्न योजनाओं को लेकर भी हेडमास्टर हमेशा माथापच्ची करते रहते हैं. अब ऐसे में स्कूल का कामकाज राम भरोसे ही हो रहा है. यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. हेडमास्टर के जिम्मे ही अकाउंटेंट से लेकर सभी कार्य निष्पादित करने की जिम्मेवारी रहती है.
मात्र 22 लिपिकों के सहारे चल रहा काम . हेडमास्टर की कमी तो हाइस्कूलों में है ही. वहीं इनका बोझ कुछ हद तक कम करने के लिए स्कूलों में लिपिक का पद भी सूचित है. लेकिन, मिली जानकारी के अनुसार हाइस्कूलों मे मात्र 22 लिपिक ही इस समय कार्यरत हैं. ऐसे में जिन स्कूलों में न तो एचएम हैं और न ही लिपिक उन स्कूलों की स्थिति का सारा दारोमदार स्कूल में कार्यरत टीचरों के कंधों पर ही है. लोगों का कहना है कि जब व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहेगी, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है.
भेजी गयी है सूचना
हेडमास्टरों और लिपिकों के रिक्त पदों पर बहाली को ले राज्य मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है मौजूदा संसाधनों में स्कूलों की व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास जारी है.
जिन स्कूलों में नहीं हैं हेडमास्टर
उदासी देवी हाइस्कूल अखलासपुर
परशुराम सिंह हाइस्कूल नीमी
नेहरु स्मारक हाइस्कूल कम्हारी मनिहारी
हाइस्कूल भगवानपुर
बीएसजीएन हाइस्कूल जलालपुर
श्री नेहरु हाइस्कूल नौहट‍्टा रामपुर
हाई स्कूल अधौरा
इंद्रासन प्रोजेक्ट हाइस्कूल जगरियां
श्री राधाकृष्ण हाइस्कूल चिताढ़ी
राजनारायण हाइस्कूल हमीरपुर
प्रोजेक्ट बालिका हाइस्कूल चांद
शत्रुहरण हाइस्कूल कल्याणपुर
जगजीवन हाइस्कूल मचखियां
आदर्श हाइस्कूल बढुपर
हाइस्कूल रामगढ़
नवभारत हाइस्कूल राजेंद्र नगर देवहलियां
आदर्श बालिका हाइस्कूल रामगढ़
जायसवाल हाइस्कूल नुआंव
सर्वोदय हाइस्कूल गुड़िया नुआंव
हाइस्कूल बसहीं बसावन
हाइस्कूल सिसवार
बघेल उच्च विद्या मंदिर घटांव कुदरा
नोट: अपग्रेडेड 40 स्कूलों में नहीं हैं हेडमास्टर
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