कैब ड्राइवर की हैवानियत का शिकार होने से पहले 10 साल की बच्ची ने मदद के लिए पुकारा-पापा-पापा

Edited by Rajneesh Anand
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10 साल की बच्ची से हैवानियत का आरोपी

Delhi Crime News : दिल्ली के फुटपाथ से 10 साल की लड़की को किडनैप किया गया, रेप किया गया और फिर पत्थर से हत्या कर दी गई. आरोपी बुरी तरह से नशे में था. जिस वक्त उसने बच्ची को उठाया, उस वक्त वह मदद के लिए पापा-पापा चिल्ला रही थी.

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Delhi Crime News : साउथ दिल्ली से एक रोंगटे खड़ी करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक कैब ड्राइवर ने फुटपाथ पर सो रही 10 साल की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और बाद में पत्थत से कूचकर उसकी हत्या कर दी.

सोती हुई बच्ची का अपहरण कर उसे गुरुग्राम ले गया था ड्राइवर

कैब डाइवर जिसकी पहचान बसु कुमार सिंह के रूप में हुई है, उसने बच्ची को फुटपाथ से उठाया और उसके लेकर गुरुग्राम की ओर गया, जहां उसने एक सुनसान जगह पर बच्ची के साथ बलात्कार किया और उसके बाद पत्थर से उसे मारा और फिर उसकी लाश को फेंक दिया. उसने पुलिस को बताया कि वह उस जगह पर एक पैसेंजर को छोड़ने आया था, जहां उसने बच्ची को सोते हुए देखा.

बिहार का रहने वाला है बच्ची का परिवार

जिस बच्ची के साथ हैवानियत हुई है उसका परिवार मूलरूप से बिहार का रहने वाला है.वे लोग पहले किराए के घर में रहते थे, लेकिन घर नहीं रहने के बाद वे लोग फुटपाथ पर रहने लगे.लड़की गुब्बारे बेचती थी और उसके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. माता-पिता के चार बच्चे हैं, जिसमें यह 10 साल की लड़की भी शामिल है. बच्ची के पिता ने टाइम्स आॅफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया कि वह सो रहे थे, तभी उन्हें अपनी बच्ची की चिल्लाहट सुनाई दी, वह पापा-पापा चिल्लाकर मदद मांग रही थी. मैंने देखा उसे जबरदस्ती कार में डाला जा रहा था. मैं उसकी ओर भागा, लेकिन तबतक कार वहां से निकल गई.

भागने की कोशिश कर रहा था आरोपी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने क्राइम सीन को रीक्रियेट किया, तो आरोपी ने वहां से भागने की कोशिश की. उस वक्त पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी और उसके पकड़ लिया. पुलिस की पूछताछ में उसने यह माना है कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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