डीएम का आदेश भी नहीं आया काम, धड़ल्ले से चल रहे अवैध क्लिनिक
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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स्वास्थ्य विभाग ने जांच के नाम पर की महज खानापूर्ति एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड बंद रहने से अवैध जांच केंद्रों की पौ बारह मरीजों से जांच के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने रुपये भभुआ सदर : जिले में नियमों को ताक पर रख कर इन दिनों धड़ल्ले से निजी नर्सिंग होम, क्लिनिक व पैथोलॉजी सेंटर […]
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स्वास्थ्य विभाग ने जांच के नाम पर की महज खानापूर्ति
एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड बंद रहने से अवैध जांच केंद्रों की पौ बारह
मरीजों से जांच के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने रुपये
भभुआ सदर : जिले में नियमों को ताक पर रख कर इन दिनों धड़ल्ले से निजी नर्सिंग होम, क्लिनिक व पैथोलॉजी सेंटर चलाये जा रहे हैं. शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इस तरह के नर्सिंग होम व क्लिनिक खोले जा रहे हैं. कुछ दिन पहले शहर के कुछेक अवैध क्लिनिकों में जिस तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जान से खिलवाड़ किया गया, यह चिंतनीय है. यह एक बड़ा सवाल के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के लिए भी प्रश्नचिह्न है. हालांकि, पूर्व डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह द्वारा सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग को शहर सहित पूरे जिले में चल रहे अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी सेंटर व जांच केंद्रों की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसके लिए स्कीम भी बनायी गयी थी. लेकिन, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जैसे-तैसे जांच कर महज खानापूर्ति की गयी.
अब भी अधिकतर जगहों पर बदस्तूर अवैध क्लिनिक व पैथोलॉजी सेंटर बेरोक-टोक चल रहे हैं. गौरतलब है कि निजी क्लिनिक या नर्सिंग होम या फिर पैथोलॉजी सेंटर खोलने के समय बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, लेकिन वास्तविक रूप से ये दावे कहीं नहीं दिखते. हालांकि क्लिनिकल स्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, क्लिनिक खोलने के लिए कई प्रावधान किये गये हैं, लेकिन इसका अनुपालन जिले भर में नहीं हो रहा.
सरकारी व्यवस्था फेल होना भी बना कमाई का जरिया : जिले में फिलहाल सरकार की ओर से मिलनेवाली फ्री सुविधा बंद या फेल हो जाने से भी अवैध क्लिनिक और डॉक्टर सहित जांच केंद्र की तादाद बढ़ने लगी है और मरीजों को बरगला कर कमाई करने का जरिया बन गयी हैं. गौरतलब है कि पिछले महीने के 24 अप्रैल से सदर अस्पताल सहित जिले के सभी अस्पतालों व पीएचसी केंद्रों पर एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं सहित हड्डी के मरीज बाहर के केंद्रों के ही भरोसे हैं. जहां एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड के नाम पर 300 से 500 रुपये उगाह लिये जाते हैं. सूत्रों की मानें, तो सदर अस्पताल में ही कुछ ऐसे दलाल फिलहाल घूम रहे हैं, जो अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे करानेवाले मरीजों को अपने मनचाहे पैथोलॉजी सेंटरों पर ले जा कर कमीशन कमा रहे हैं.
अवैध संस्थानों पर होगी कार्रवाई
: इस मामले में सिविल सर्जन डॉ नंदेश्वर प्रसाद ने बताया कि कैमूर जिले में कई संस्थानें हैं, जिनकी जांच की जानी है. गलत तरीके से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उन पर प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थान में एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा ऊपर से ही बंद है. सदर अस्पताल में इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है.
सिर्फ पैसा कमाना है उद्देश्य
दरअसल, अवैध निजी नर्सिंग होम, क्लिनिक व पैथोलॉजी खोलने के पीछे मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना ही होता है. जिले में अधिकांश ऐसे स्वास्थ्य संस्थान हैं, जो अपने कृपा पात्रों के द्वारा मरीजों व उनके परिजनों को बरगला कर उनका आर्थिक दोहन करते हैं. स्वास्थ्य सेवा से जुड़े जानकारों की मानें, तो मरीजों के उपचार के नाम पर कई स्तरों पर इनके द्वारा दोहन किया जाता है. खासकर विभिन्न तरह की जांच के नाम पर अत्यधिक आर्थिक दोहन किया जाता है.
नियम के अनुसार संसाधनों का अभाव
क्लिनिकल स्टेबलिसमेंट एक्ट में कई तरह के प्रावधान हैं. जिले के अधिकांश स्वास्थ्य संस्थान मानकों पर खरे नहीं उतरते. एक्ट के तहत भी जिन संस्थानों को औपबंधिक निबंधन दिया गया है, उसमें से भी अधिकांश प्रावधान पूरे नहीं किये गये हैं. वैसे संस्थान रसूख व प्रभाव के बल पर निबंधन, तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन ऐसे संस्थानों के पास आधारभूत संरचना के अलावा कई बुनियादी चीजों का भी अभाव होता है. ऐसी संस्थान मरीज की बीमारी कोई भी हो, उसका इलाज शुरू कर देते हैं और आर्थिक दोहन के बाद जब मरीज की हालत बिगड़ने लगती है, तो उसे कहीं और ले जा कर इलाज कराने को कह अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसे हाल में मरीज या उनके मरीज न इधर के रहते हैं और न उधर के.
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