बंध्याकरण में रुपये मांगने पर हंगामा
अकबरपुर : अकबरपुर पीएचसी में महिलाओं का बंध्याकरण कर उन्हें जाड़े के मौसम में जमीन पर ही लिटा दिया गया.अब इस प्रकार के नजारे आम हो गये हैं. क्योंकि, खबरों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की कई खामियों को लगातार उजागर किया जाता रहा है. इसी माह इसी अस्पताल में बिल्कुल ऐसा ही नजारा देखने […]
अकबरपुर : अकबरपुर पीएचसी में महिलाओं का बंध्याकरण कर उन्हें जाड़े के मौसम में जमीन पर ही लिटा दिया गया.अब इस प्रकार के नजारे आम हो गये हैं. क्योंकि, खबरों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की कई खामियों को लगातार उजागर किया जाता रहा है. इसी माह इसी अस्पताल में बिल्कुल ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां महिलाओं को फर्श पर ही लिटा दिया गया.
मंगलवार की रात 27 महिलाओं का बंध्याकरण किया गया था और सभी को अस्पताल में जमीन पर ही लिटा दिया गया. किसी प्रकार मरीजों के परिजन ने सुबह तक इंतजार किया. बुधवार की सुबह होते ही मरीजों के परिजन ने अस्पताल में हंगामा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों से बेड के नाम पर 10 रुपये लिए,जांच के नाम पर 30 रुपये लिये गये और तो और दवा के भी पैसे की मांग की गयी.
एक परिजन को जब यह बात सुबह पता चली, तो उसने फार्मासिस्ट से पूछा कि आपने पैसे किस बात के लिए, तो उनसे ही वह कर्मी उलझ गया. कुछ देर के लिए अस्पताल में हंगामा होता रहा. लोदीपुर गांव के मनोज चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन पर रुपये मांगने की बात कही.दूसरी ओर अस्पताल के एक हिस्से में नये बेड यूं ही पड़े हुए हैं. मगर, वह एक केवल शोभा की वस्तु बनी हुई है. अस्पताल प्रबंधन को तनिक भी इस बात का प्रभाव नहीं है कि बंध्याकरण के बाद महिलाओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
इस बात से पूरी तरह वाकिफ होते हुए भी उन्हें जमीन पर ही लिटा दिया गया. बिहार में स्वास्थ्य मंत्री कितनी भी बातें कर ले मगर अकबरपुर अस्पताल अपनी सच्चाई खुद बयां कर रही है. अब ऐसे में यह एक आदत सी बन गयी है. इसका स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है. अस्पताल में खाली पड़े नये बेडों को आज तक इस्तेमाल में नहीं किया गया.
चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ बद्री प्रसाद से इस मामले मे पूछा गया तो उन्होंने रुपये लेने की बात सुन कर किसी भी प्रकार के जवाब देने से इन्कार कर दिया. उन्होंने कहा कि नये बेड आकर रखे हुए हैं, विभाग का आदेश प्राप्त नहीं होने कारण उसका उपयोग नहीं हो रहा है.
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