पांच महीने से सफाई का टेंडर नहीं

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महीने में डेढ़ करोड़ का राजस्व देनेवाले भभुआ रोड स्टेशन पर लगा रहता है गंदगी का अंबार मोहनिया शहर : गया-मुगलसराय रेलखंड पर अनुमंडल स्थित सभी रेलवे स्टेशनों का पिछले पांच महीनों से सफाई का टेंडर खत्म हो गया. इसके कारण स्टेशन प्रबंधक द्वारा किसी तरह सफाई का कार्य कराया जा रहा है. अनुमंडल में […]

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महीने में डेढ़ करोड़ का राजस्व देनेवाले भभुआ रोड स्टेशन पर लगा रहता है गंदगी का अंबार
मोहनिया शहर : गया-मुगलसराय रेलखंड पर अनुमंडल स्थित सभी रेलवे स्टेशनों का पिछले पांच महीनों से सफाई का टेंडर खत्म हो गया. इसके कारण स्टेशन प्रबंधक द्वारा किसी तरह सफाई का कार्य कराया जा रहा है. अनुमंडल में स्थित भभुआ रोड स्टेशन को बी ग्रेड का दर्जा मिला है. लेकिन, इनदिनों सफाई की व्यवस्था रामभरोसे है. स्टेशन परिसर से लेकर प्लेटफॉर्म तक गंदगी पसरा हुआ है. सबसे खराब स्थिति प्रतीक्षालय के शौचालय का है, जहां सफाई न के बराबर है.
गौरतलब है कि उक्त स्टेशन को बी ग्रेड का दर्जा मिला है, जहां एक दिन का राजस्व लगभग पांच लाख रुपये है. लेकिन, इसके मुताबिक स्टेशन पर सुविधा की कमी है. रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने पिछले साल बजट में रेलवे को स्वच्छता का मंत्र दिया था और ट्रेनों व स्टेशन परिसरों में साफ-सफाई पर जोर दिया था. उनका यह प्रयास कितना सार्थक रहा, इसका उदाहरण स्टेशन से लेकर प्रतीक्षालय में फैली गंदगी है. पता चला है कि शुक्रवार को डीआरएम के आने की सूचना थी, जिस पर कुछ सफाई भी दिख रही थी. फिर भी गंदगी चारों तरफ फैली थी. चौंकानेवाली बात है कि पांच माह से सफाई का टेंडर खत्म हो गया है.
लेकिन, इस पर किसी का ध्यान नहीं है. जबकि, प्रतिदिन अप डाउन मिला कर 80 ट्रेनों का भभुआ रोड स्टेशन पर ठहराव होता है. बताया जाता है कि तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद के समय में उक्त स्टेशन को बी ग्रेड का दर्जा मिला. लेकिन, इसके अनुरूप सुविधा कुछ नहीं दिया गया. यहां अब भी कुली से लेकर कोच इंडिकेटर की व्यवस्था नहीं है.
अनुमंडल के सभी स्टेशनों पर सफाई का टेंडर खत्म: भभुआ रोड स्टेशन के साथ-साथ अनुमंडल में स्थित सभी आसपास के स्टेशन कर्मनाशा से लेकर कुदरा स्टेशन तक का सफाई का टेंडर पांच माह से खत्म हो गया है, जहां यात्री गंदगी के बीच रहने को विवश हैं.
सभी स्टेशनों पर सफाई के अभाव में गंदगी से यात्री परेशान हैं. स्टेशन के सफाई के लिए स्थानीय स्तर पर अपने संसाधन से स्टेशन की सफाई कराने का निर्णय लिया. इसके बाद स्वच्छता की रही सही हवा भी निकल गयी. सूत्र बताते हैं कि ठेकेदारी सिस्टम में भी भारी पेच है और ऊपर से नीचे तक के लोगों को खुश करने के चक्कर में एजेंसी सफाई पर ध्यान नहीं दे पाती है.
सवाल यह खड़ा होता है कि जिस स्टेशन से एक माह में डेढ़ करोड़ का राजस्व मिलता हो, फिर भी इस स्टेशन पर सफाई से लेकर अन्य सुविधा का ध्यान रेलवे अधिकारी नहीं दे, तो साफ कहा जा सकता है कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु के छत्रछाया में भभुआ रोड स्टेशन पर स्वच्छता की दरकिनार है.
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