Jehanabad News : करपी और वंशी प्रखंडों में यूरिया की कालाबाजारी से किसानों की बढ़ी परेशा

Published by : SHAH ABID HUSSAIN Updated At : 08 Jan 2026 11:03 PM

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वंशी और करपी प्रखंडों में इन दिनों यूरिया खाद की भारी किल्लत और कालाबाजारी से किसान गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं.

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करपी. वंशी और करपी प्रखंडों में इन दिनों यूरिया खाद की भारी किल्लत और कालाबाजारी से किसान गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं. रबी फसल के इस अहम समय में किसानों को निर्धारित मूल्य 266 रुपये प्रति बोरी के बजाय 350 से 400 रुपये तक चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इससे किसानों की खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. शहरतेलपा, करपी, बेलखरा समेत अन्य स्थानीय बाजारों में खुलेआम अधिक कीमत पर यूरिया खाद बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. किसानों का आरोप है कि सरकारी और निजी खाद विक्रेताओं के यहां यूरिया की उपलब्धता बेहद सीमित बतायी जा रही है. जैसे ही खाद की खेप आती है, उसे गुपचुप तरीके से ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है. कई दुकानदार यूरिया देने के बदले किसानों को अन्य महंगे उत्पाद खरीदने के लिए भी मजबूर कर रहे हैं. छोटे और सीमांत किसानों के लिए स्थिति और भी गंभीर हो गयी है. किसान पहले से ही महंगे बीज, डीजल और कीटनाशकों की मार झेल रहे हैं. ऐसे में यूरिया की कालाबाजारी ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं. किसान नेता पुण्यदेव सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक निगरानी के अभाव में खाद विक्रेताओं के हौसले बुलंद हैं. यदि समय पर उचित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया तो गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. किसानों का कहना है कि यूरिया की कमी से फसलों की समय पर खाद नहीं हो पा रही है, जिससे उत्पादन घटने की आशंका है. स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद वितरण व्यवस्था की सख्त निगरानी की जाये, नियमित छापेमारी कर कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित की जाये, ताकि किसानों को राहत मिल सके.

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