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जिले में ठंड की आहट के साथ ही बढ़ा एयर पॉल्यूशन, 155 है एक्यूआइ का स्तर

एक तो गत दिनों बदली और बारिश तथा उसके पहले दीपावली के पटाखे के धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है़

जहानाबाद. जिले में ठंड की आहट के साथ ही प्रदूषण के स्तर में भी उछाल आ गया है. एक तो गत दिनों बदली और बारिश तथा उसके पहले दीपावली के पटाखे के धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है़ वातावरण में प्रदूषण के बढ़ने से जिले के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है़ गत दिनों हुई बारिश के बाद से जिले में सुबह और रात में ठंड महसूस हो रही है. इसके साथ-साथ सुबह में कुहासा के कारण हवा में नमी के कण तैरने हैं जिसमें धूलकण और वाहनों के धुएं में शामिल जहरीले प्रदूषित कण फैलकर अटक जाते हैं जिससे वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है़ इसी कारण ठंड के मौसम में प्रदूषण का लेवल बढ़ जाता है़ जिले में पिछले दिनों बारिश के बाद से तापमान में गिरावट आयी है और उसके कारण सुबह और रात में में हल्का कोहरा भी रहता है इसी कोहरे और धुंध में प्रदूषण के कण अटक जाते हैं और वे वातावरण में उच्च स्तर पर नहीं जा पाते़ जब कभी सुबह में हल्की धुंध भी रहती है़ जिले का अधिकतम तापमान घटकर इन दिनों 28 डिग्री सेंटीग्रेड और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड पर आ गया है़ आने वाले एक सप्ताह में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है़ जिसके कारण ठंड और बढ़ सकती है़ न्यूनतम तापमान घटकर 12 डिग्री सेंटीग्रेड पर आ सकता है़ ऐसे में प्रदूषण का लेवल भी बढ़ सकता है़

प्रदूषण का लेवल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक

शहर में शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर 155 एक्यूआइ नापा गया़ यह प्रदूषण का यह लेवल स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होता है़ एक्यूआइ हवा में प्रदूषण नापने की एक इकाई है जिसे है पता चलता है कि वातावरण में कितने जहरीले गैस या प्रदूषण के कण तैर रहे हैं जो मानव शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जीरो से 50 एक्यूआइ वाली हवा बेहतर और सांस लेने योग्य मानी जाती है 50 से 100 एक्यूआइ वही हवा को संतोषजनक मानी जाती है जबकि से उच्च स्तर वाली हवा प्रदूषित मानी जाती है। जहानाबाद शहर में बारिश और दीपावली के पहले प्रदूषण का यह एक्यूआइ स्तर 120 के आस पास नापा जा रहा था़ किंतु ठंड और वातावरण में सुबह में कुहासा और वाहन के धुएं के कारण इसका लेवल 155 से पार कर गया़ शहर में सुबह 10 बजे के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है और शाम होते होते प्रदूषण अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच जाता है़ शाम में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का कारण दिन भर वाहनों के परिचालन से वातावरण में की हवा में तैरते जहरीले कण और गैस का बढ़ना बताया जा रहा है़ सुबह और शाम के समय कुहासे की वजह से उसमें धूल कण गैस और जहरीली धातु के कण अटक जाते हैं. वाहनों का परिचालन अधिक होने के साथ साथ प्रदूषण का लेवल बढ़ने लगता है.

कूड़ा जलाने से भी बढ़ता है प्रदूषण

शहर में कई जगहो पर फेंके गए कूड़े में आग लगाने से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है शहर के दरधा नदी के एनएच 22 और 33 के किनारे विभिन्न जगहों पर जगह-जगह कूड़े फेंके गये हैं. इसके अलावा नदी तथा राज्य की सड़कों के किनारे भी फेंके गये कूड़े में लोग आग लगा देते हैं. इनमे बड़ी मात्रा पॉलिथीन और प्लास्टिक के कचरे की होती है. सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद भारद्वाज बताते हैं कि बभना और निजामुद्दीनपुर के निकट नगर परिषद के द्वारा फेके गये कूड़े में अक्सर आग लगा रहता हैं जिसके कारण हवा में जहरीली गैसे फैलती है.

इन कारणों से बढ़ता है प्रदूषण

सबसे अधिक प्रदूषण वाहनों के परिचालन से होता है

वाहनों में भी डीजल के वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं

सही ढंग से रखरखाव नहीं होने के कारण भी वाहन अधिक प्रदूषण उत्सर्जित करते हैं

15 साल या उससे अधिक पुराने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं

वाहनों के अलावा जनरेटर और चूल्हे के धुएं से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है. कंपनियों के द्वारा उत्सर्जित गैस और कचरे से भी प्रदूषण फैलने में मदद मिलती है. पराली जलाने से भी वातावरण में प्रदूषण का फैलाव होता है. पहले जहानाबाद जिले में पराली जलाने की परंपरा नहीं थी, लेकिन हाल के वर्षों में जिले के खेतों में पराली जलाने का प्रचलन बढ़ा है. इससे भी प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है.

इन जहरीली गैसों से होता है स्वास्थ्य को नुकसान

डीजल और पेट्रोल के वाहनों और जनरेटर के परिचालन से सबसे अधिक जहरीली गैस निकलती है. इसके बाद कोयला लकड़ी कूड़ा कचरा पॉलिथीन और पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है. जिससे वातावरण में प्रदूषण का जहर फैल जाता है इनसे सल्फर ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, लेड, अमोनिया और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे जहरीले का प्रमुख है. ये जहरीली गैसें स्वास्थ्य पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डालती है जिससे मनुष्य को सांस फेफड़े गला आंख और एलर्जी की बीमारी हो जाती है प्रदूषण से कैंसर का खतरा भी बना रहता है.

क्या कहते हैं चिकित्सक

नालंदा मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ गिरिजेश कुमार बताते हैं कि स्वच्छ और बेहतर ऑक्सीजन स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से शरीर में ऑक्सीजन की अधिक मात्रा जाती है. जो स्वास्थ्य पर बेहतर इफेक्ट करता है, किंतु प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस के साथ प्रदूषण का जहर मुंह और नाक से गला से होते हुए फेफड़ा तक पहुंचता है. इन हवा में मौजूद जहरीली कण और गैस स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. इससे आंखों में जलन गले में खराश खांसी फेफड़े में इन्फेक्शन एलर्जी यहां तक कि कैंसर रोग होने तक का खतरा बना रहता है. प्रदूषण की वजह से स्किन और आंखों में एलर्जी भी हो जाती है. जैसे जैसे ठंड बढेगी वैसे वैसे वातावरण में ओस की बूंदें वाष्प कण अधिक मौजूद होंगे. जिनमें प्रदूषण के जहरीले कण और गैस अटक जाते हैं, जो सांस के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है और शरीर को भारी नुकसान पहुंचाता है. इसलिए जहां तक संभव हो सके प्रदूषण वाली जगहों और जिन जगहों पर ज्यादा वाहन चलते हैं या लकड़ी कोयला पराली कूड़े कचरे जलाये जाते हैं उससे बचना चाहिए. मॉर्निंग या इवनिंग वॉक उस क्षेत्रों में करना चाहिए जहां प्रदूषण ना हो या कम हो.

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