अरवल
. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अवसर पर जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस की अध्यक्षता में समाहरणालय सभा कक्ष में प्री-हॉस्पिटल प्रशिक्षण एवं सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के बाद घायलों को समय पर प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने तथा आमजन को जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा. डीएम अमृषा बैंस ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की रक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है. उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और ट्रैफिक सिग्नल का सम्मान करें. सुरक्षित ड्राइविंग को अपनी आदत बनाकर ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है. प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर तकनीक की विस्तार से जानकारी दी गयी. बताया गया कि सीपीआर एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या हृदय की धड़कन रुक जाती है. प्रशिक्षकों ने बताया कि सीपीआर के दौरान व्यक्ति की छाती के बीच में दोनों हाथ रखकर 30 बार 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई तक दबाव देना चाहिए, जिसकी गति 100 से 120 दबाव प्रति मिनट होनी चाहिए. इसके बाद दो बार मुंह से सांस दी जाती है। यह प्रक्रिया मेडिकल सहायता आने या व्यक्ति के होश में आने तक जारी रखनी चाहिए. जिला परिवहन पदाधिकारी अमनप्रीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ ऐसे प्रशिक्षण आमजन को सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर सहायता और रक्त उपलब्ध कराना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है. कार्यक्रम में विशेष कार्य पदाधिकारी सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे.
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