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न्यायालय ने जेल अधीक्षक व जेलर को जारी किया व्यक्तिगत कारण बताओ नोटिस

Updated at : 30 Aug 2024 10:34 PM (IST)
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न्यायालय ने जेल अधीक्षक व जेलर को जारी किया व्यक्तिगत कारण बताओ नोटिस

अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अदिति कुमारी इंचार्ज कोर्ट न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कि अदालत ने जेल अधीक्षक, जेलर मंडल कारागार को अपना व्यक्तिगत कारण बताओ नोटिस प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए कहा कि आपके और अन्य दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा क्यों न दर्ज किया जाये.

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जहानाबाद नगर. अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अदिति कुमारी इंचार्ज कोर्ट न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कि अदालत ने जेल अधीक्षक, जेलर मंडल कारागार को अपना व्यक्तिगत कारण बताओ नोटिस प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए कहा कि आपके और अन्य दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा क्यों न दर्ज किया जाये. दरअसल पूरा मामला है कि अदालत के समक्ष अपनी हाजिरी के दौरान एक अभियुक्त ने जेल में जेल अधिकारी द्वारा मारपीट का शिकायत किया था. साथ ही उसके अधिवक्ता ने भी उसी शिकायत के संबंध में एक याचिका दायर किया था, उसने अदालत के समक्ष बताया कि जेलर के आदेश पर सिपाही और अन्य लोगों ने लाठी-डंडा से बेरहमी से मारपीट किया है, जिसके कारण उक्त कैदी के पैर, जांघ, हाथ पर गंभीर चोटें आई है, जिससे वह चलने में असमर्थ हो गया है. इसके अलावा अदालत द्वारा पूछे जाने पर उक्त अभियुक्त ने कुछ शरीर के अंग भी दिखाए, जहां हमले के कारण उसे चोटें आयी थी. चोट के निशान के साथ ही अदालत ने यह भी देखा है कि चोट के कारण अभियुक्त सामान्य रूप से चलने में असमर्थ है. अभियुक्त ने न्यायालय को बताया कि जेल प्रशासन ने उसे झूठे मामले में फंसाने और भागलपुर जेल भेजने तथा शिकायत करने पर फिर से मारपीट करने की धमकी दी है. अदालत ने कहा कि अभियुक्त के साथ जेल प्रशासन ने क्रूरतापूर्वक मारपीट की है, यह बहुत ही विडंबनापूर्ण है कि कैदियों के संरक्षक होने के नाते, जेल प्रशासन ने बिना किसी वैध अधिकार के केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से मारपीट की है. इसी को लेकर अदालत ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि उक्त घटना बाले दिन का सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखें और न्यायालय को भेजें तथा अभियुक्त को सिविल सर्जन के समक्ष मेडिकल जांच के लिए प्रस्तुत करें और उसे उचित उपचार प्रदान करें. अदालत ने जेल अधीक्षक, जेलर को अपना व्यक्तिगत कारण बताओ नोटिस प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस घटना के लिए आपके और आपके अन्य दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मुक़दमा क्यों न दर्ज की जाए. साथ ही सिविल सर्जन जहानाबाद को चिकित्सा जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने के साथ साथ अभियुक्त का जख्म प्रतिवेदन न्यायालय में समर्पित करने का भी निर्देश दिया है. डीएम को इस घटना के संबंध में जांच करने तथा मंडल कारा के दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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