जहानाबाद में मंदिर में चल रहा सरकारी स्कूल: भवन नहीं, फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर 52 बच्चे

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मंदिर परिसर में चल रहा राजकीय प्राथमिक विद्यालय

मंदिर परिसर में फर्श पर बैठकर पढ़ते बच्चे एवं विद्यालय का ऑफिस एवं रसोई रूम

जहानाबाद के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. भवन न होने के कारण कक्षाएं मंदिर परिसर में चल रही हैं, और बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

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Jehanabad News: एक ओर बिहार सरकार सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने का दावा कर रही है. वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय का एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मंदिर परिसर में संचालित हो रहा है. विद्यालय का अपना भवन तक नहीं है और छोटे-छोटे बच्चों को भीषण गर्मी, बरसात और कड़ाके की ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.

मंदिर परिसर में चल रही कक्षा एक से पांचवीं तक की पढ़ाई

जिला मुख्यालय स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का संचालन कई वर्षों से गौरक्षिणी स्थित मंदिर परिसर में किया जा रहा है. इस विद्यालय में कक्षा एक से पांचवीं तक की पढ़ाई होती है. वर्तमान में यहां 52 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनकी शिक्षा की जिम्मेदारी चार शिक्षकों पर है.

बेंच-डेस्क नहीं, फर्श पर बैठकर पढ़ते हैं बच्चे

विद्यालय में बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है. बेंच-डेस्क के अभाव में सभी छात्र-छात्राएं फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधनों की भी कमी है. हालांकि ब्लैकबोर्ड उपलब्ध है, लेकिन उसके समुचित उपयोग के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है.

एक ही कमरे में रसोई, रिकॉर्ड और किताबों का इंतजाम

मंदिर परिसर में बना एक छोटा कमरा विद्यालय के रसोईघर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसी कमरे में विद्यालय का गोदरेज, महत्वपूर्ण फाइलें, कॉपियां और किताबें भी रखी जाती हैं. जगह की कमी के कारण विद्यालय का संचालन कई तरह की कठिनाइयों के बीच हो रहा है.

पीने का पानी और शौचालय की भी नहीं है व्यवस्था

विद्यालय में पीने के पानी की अलग से कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चों और शिक्षकों को मंदिर परिसर में लगे नल से पानी लाना पड़ता है. वहीं विद्यालय में शौचालय नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को मंदिर परिसर के शौचालय का उपयोग करना पड़ता है.

स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय वर्षों से इसी स्थिति में संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक भवन निर्माण नहीं कराया गया. कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अभिभावकों का कहना है कि केवल नामांकन बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी. बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है.

सरकारी दावों पर उठ रहे सवाल

जिला मुख्यालय में स्थित इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े करती है. भवन, पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक विद्यालयों के दावों की वास्तविक तस्वीर भी सामने आ रही है.

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