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कालाबाजारी में किसानों को मिल रहा खाद

Updated at : 04 Sep 2025 6:45 PM (IST)
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कालाबाजारी में किसानों को मिल रहा खाद

जिला में खाद की कालाबाजारी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिला में खाद की भारी किल्लत के बीच दुकानदार मनमानी कीमतों पर खाद बेच रहे हैं.

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अरवल. जिला में खाद की कालाबाजारी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिला में खाद की भारी किल्लत के बीच दुकानदार मनमानी कीमतों पर खाद बेच रहे हैं. किसानों के मुताबिक 266 रुपये प्रति बोरा की सरकारी दर वाली यूरिया खाद को दुकानदार 400 रुपए बोरा की दर से बेच रहे हैं. दुकानदार किसानों को खाद देने के लिए जबरन कीटनाशक दवाई जिंक खरीदने की शर्त भी रख रहे हैं. जो किसान जिंक खरीदने से मना करते हैं, उन्हें खाद नहीं दिया जाता है. इस वजह से कई किसान धान रोपनी के बाद खेत का सोहनी कर चुके अब धान कि हरियारली बनाये रखने के लिए यूरिया खाद कि जरूरत है. लेकिन कई दुकान घूमने के बाद यूरिया खाद निर्धारित दर से अधिक किमत पर मिल रहा है. दुकानदार मनमानी तरिके से खाद बेच रहे है. किसान शैलेश कुमार, गोविन्द कुमार, गौतम शर्मा, योगेंद्र शर्मा रविंद्र सिंह, बाबूलाल राम, खलीफा यादव ने बताया कि कही पर 360 तो कही 370 तो कही कही 420 रूपये कि किमत पर खाद मिल रहा है. सरकारी कीमत मात्र 266.50 रुपये : दरअसल, सरकार ने यूरिया की कीमत 266.50 रुपया प्रति बोरा निर्धारित कर रखी है लेकिन कहीं भी इस दर पर यूरिया नहीं मिलता है. लाइसेंसी दुकानदार भी लोडिंग-अनलोडिंग के नाम पर 30-35 रुपया ले लेते हैं. किसानों ने बताया कि अंगूठा 266 पर ही लगवाता है और मनमाने तरीके से खाद देता है. जब कहते है 266 पर अंगूठा पॉस मशीन पर लग रहा तो अधिक कीमत क्यों ले रहे हो तो कहा जाता है 2 बोरा ही मिल पायेगा. अइयारा के ही किसान सुरेंद्र सिंह को 400 रुपया प्रति बोरा कीमत चुकानी पड़ी. कोहडौल के किसान डब्ल्यू कुमार ने स्थानीय दुकानदार से 400 रुपया प्रति बोरा यूरिया खरीदने है. सरकारी कीमत मात्र 266.50 रुपये दरअसल, सरकार ने यूरिया की कीमत 266.50 रुपये प्रति बोरा निर्धारित कर रखी है. लेकिन कहीं भी इस दर पर यूरिया नहीं मिलता है. लाइसेंसी दुकानदार भी लोडिंग-अनलोडिंग के नाम पर 30-35 रुपया ले लेते हैं. लाइसेंसी दुकानों से यूरिया लेते हैं तो वहां भी आपको करीब 300 रुपये देने होंगे. अन्य जगहों प्रत्येक बोरा पर 100-130 रुपये अधिक लिया जाता है. रसीद मांगने पर दुकानदार यूरिया देने से ही इन्कार कर देते हैं. यह सब कुछ जानते हुए जिला प्रशासन के द्वारा जांच और बार-बार कार्रवाई की चेतावनी तो दी जाती है लेकिन कार्रवाई होती नहीं है. विभाग के अनुसार जिले में 153 खाद विक्रेता सक्रिय हैं. जिसमें 10 थोक विक्रेता है. कुछ दुकानदारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सरकार किसानों को सब्सिडी के तहत यूरिया उपलब्ध कराने की बात तो करती है, लेकिन यह सिर्फ कागजों तक रह जाता है. हम लोग जिस थोक विक्रेता से यूरिया की खरीदी करते हैं वो हमें एक बोरी 266 रुपये तक में देता है. इसके बाद लाने का खर्च तथा लोडिंग-अनलोडिंग खर्च भी आता है. इसके बाद हमलोग एक बोरी में महज 20 रुपये अधिक ही किसानों से लेते हैं. यदि हमलोगों को सही कीमत में यूरिया उपलब्ध हो जाय तो किसानों को लाभ होगा. क्या कहते है अधिकारी जिले में 10 उर्वरक दुकानों से स्पष्टीकरण किया गया है. यूरिया कि कमी नहीं है. कल 967.95 मैट्रिक टन खाद और आ जायेगा. उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर खुलने के बाद भी कोई किसान शिकायत दर्ज नहीं करा रहे है. किसान अगर शिकायत दर्ज करवाए तो कार्रवाई निश्चित होगी. संजू लता, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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