अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद विश्व भर से आई प्रतिक्रियाएं, तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा मंडराया
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 Mar 2026 3:07 PM
अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद विश्व में प्रतिक्रिया
Ayatollah Khomeini Death : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की ईरान पर हुए हमले में मौत की पुष्टि के बाद से विश्वभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कोई देश इस हमले के साथ खड़ा है, तो कोई दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दे रहा है, तो कोई हमले की तीव्र आलोचना कर रहा है.
Ayatollah Khamenei Death : 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिसाइलों से हमला शुरू किया और 1 मार्च को ईरानी मीडिया ने यह कंफर्म किया कि उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई है, तो पूरी दुनिया में यह हाॅट केक बन गया कि ईरान पर हमला कब तक चलेगा? क्या यह युद्ध और बढ़ेगा? क्या पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर जा रही है? ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर और ईरान के साथ जारी टकराव का दुनिया की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया इस प्रकार है–
ट्रंप ने की खामेनेई की मौत की घोषणा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले खोमेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश की बागडोर अपने हाथों में ‘वापस लेने का सबसे बड़ा मौका मिला है.
ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के 86 वर्षीय नेता की मौत की पुष्टि की लेकिन मौत की वजह नहीं बताई. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई है.
वहीं, एक बयान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है.
उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं.
फ्रांस इस हमले में शामिल नहीं
उन्होंने कहा, हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए. आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए.
बाद में, आपात सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बारे में फ्रांस को न पहले से बताया गया था और न ही फ्रांस इसमें शामिल था. उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकालने की कोशिशें और तेज करनी चाहिए. मैक्रों ने कहा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थिरता जैसे मुद्दे सिर्फ हमलों से ही हल हो जाएंगे, यह सोचना गलत है.
22 देशों के अरब लीग ने ईरान के हमलों को शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन” बताया. यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है. मोरक्को, जॉर्डन, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कुवैत, बहरीन, कतर और अमीरात समेत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की निंदा की.
सीरिया ने की ईरान की निंदा
पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समय में सीरिया इस क्षेत्र में ईरान का बहुत करीबी सहयोगी था और इजराइल का कड़ा आलोचक भी था. लेकिन सीरिया के विदेश मंत्रालय के बयान में सिर्फ ईरान की निंदा की गई, जो दिखाता है कि नयी सरकार आर्थिक रूप से शक्तिशली देशों और अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है.सऊदी अरब ने कहा कि वह ईरान की विश्वासघाती आक्रामक कार्रवाई और संप्रभुता के खुले उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करता है.
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने बयान में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है. विवाद शुत्रता और खून-खराबे से नहीं, शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाए जाने चाहिए.
इस पूरे मामले पर देशों के बयान बेहद संयमित शब्दों में आ रहे हैं. न्यूजीलैंड ने खुलकर पूरा समर्थन नहीं किया, लेकिन शनिवार को कहा कि अमेरिका-इजराइल के हमले ईरान सरकार को भविष्य का खतरा बनने से रोक रहे हैं.
रूस ने पहले से तय, सत्ता परिवर्तन करवाने वाला हमला बताया
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने संयुक्त बयान में कहा, किसी सरकार की वैधता उसके लोगों के समर्थन पर टिकी होती है. ईरानी शासन बहुत पहले ही वह समर्थन खो चुका है. रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को पहले से तय और बिना उकसावे का, एक संप्रभु और संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश पर सशस्त्र हमला बताया. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता की आड़ ले रहे हैं, जबकि उनका असली मकसद सत्ता को बदलना है.
इसी तरह चीन की सरकार ने कहा कि वह ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर बहुत चिंतित है. चीन ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया.
चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके क्षेत्र की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.
कनाडा ने सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया
अमेरिका के साथ हाल में तनावपूर्ण रहे संबंधों के बावजूद कनाडा ने भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, ईरान का इस्लामी शासन पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंक का सबसे बड़ा स्रोत है. कई देशों में चिंता साफ दिख रही है. नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने नॉर्वे के प्रसारक एनआरके से बातचीत में कहा कि उन्हें चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम होने का मतलब पश्चिम एशिया में एक नया, बड़ा युद्ध हो सकता है.
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन ‘इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन’ ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की.इस संगठन की कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं. इससे तनाव और बढ़ सकता है, साथ ही परमाणु हथियारों के विस्तार और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है.
यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी करके सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने की अपील की, ताकि परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.अरब लीग ने भी सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं से कहा कि वे जितनी जल्दी हो सके तनाव कम करने के लिए काम करें, ताकि क्षेत्र को अस्थिरता और हिंसा की मार से बचाया जा सके, और फिर से बातचीत की राह अपनाई जा सके.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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