अरवल: एक अगस्त से होगी बीपी, शुगर और कैंसर की जांच, एएनएम जाएंगी घर-घर

Author Nishikant kumr|Edited by Rajeev Kumar
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सदर अस्पताल जहानाबाद

सदर अस्पताल जहानाबाद

अरवल जिले में 1 अगस्त से गैर-संचारी रोगों के खिलाफ एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान शुरू होने वाला है. 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों की घर-घर जाकर जांच की जाएगी, जिसमें ब्लड प्रेशर, शुगर और सामान्य कैंसर की स्क्रीनिंग शामिल है.

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Arwal News : अरवल जिले में गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एक अगस्त से विशेष स्क्रीनिंग अभियान शुरू करेगा. अभियान के तहत 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों की घर-घर जाकर जांच की जाएगी. आशा कार्यकर्ता और एएनएम ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर की जांच के साथ-साथ मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की स्क्रीनिंग भी करेंगी. अभियान का उद्देश्य बीमारियों की समय रहते पहचान कर मरीजों का इलाज सुनिश्चित करना है.

गैर-संचारी रोगों की समय पर होगी पहचान

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य गैर-संचारी रोगों और सामान्य कैंसर की 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग करना है. जांच के दौरान जिन लोगों में बीमारी के लक्षण मिलेंगे, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा. इसके बाद उनका इलाज गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कराया जाएगा.

एनपी-एनसीडी पोर्टल पर प्रतिदिन अपलोड होगा डाटा

अभियान के दौरान की गई जांच, उपचार और फॉलोअप का पूरा डाटा प्रतिदिन एनपी-एनसीडी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर बीपी मॉनिटर, ग्लूकोमीटर, आवश्यक दवाएं और अन्य चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभियान पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके.

सप्ताह में चार दिन गांवों में चलेगा अभियान

गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अरबिंद कुमार ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार जिला अस्पताल से लेकर सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से यह अभियान चलाया जाएगा. प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र पर सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को गांवों में तथा सप्ताह में दो दिन स्वास्थ्य संस्थान में स्क्रीनिंग की जाएगी. प्रतिदिन कम से कम 40 लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है. जांच में संदिग्ध पाए जाने वाले मरीजों को एपीएचसी और पीएचसी में रेफर किया जाएगा, जहां उनकी पुष्टि के बाद उपचार शुरू कराया जाएगा.

आशा और एएनएम की होगी अहम भूमिका

अभियान में आशा कार्यकर्ता और एएनएम की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. वे घर-घर जाकर 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी और बीमारी की आशंका मिलने पर उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने का काम करेंगी, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके.


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