उपचारित बीज का ही प्रयोग करें किसान
जहानाबाद : जिले के अधिकतर खेतों में इस वर्ष नमी की मात्रा अधिक रहने के कारण कीट-मकौड़े का प्रभाव रबी फसल पर भी पड़ सकता है. इसके बचाव एवं निदान के लिए कृषि विभाग ने किसानों को रबी फसल के बुआई में उपचारित बीज का ही प्रयोग करने की सलाह दी है. किसी विभाग के […]
जहानाबाद : जिले के अधिकतर खेतों में इस वर्ष नमी की मात्रा अधिक रहने के कारण कीट-मकौड़े का प्रभाव रबी फसल पर भी पड़ सकता है. इसके बचाव एवं निदान के लिए कृषि विभाग ने किसानों को रबी फसल के बुआई में उपचारित बीज का ही प्रयोग करने की सलाह दी है. किसी विभाग के पदाधिकारी ने कहा है कि जिन खेतों में अधिक दिनों तक जल का जमाव रहने व नमी रहने से कीट मकौड़े का प्रभाव बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को रबी फसल लगाने में संवेदनशील रहने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि किसान बीज बोने के समय अक्सर गलती कर बैठते हैं. रबी फसल के बुआई में लापरवाही का खामियाजा किसानों को बाद में भुगतना पड़ता है. थोड़ी सी चुक के कारण किसानों का मेहनत पर पानी फिर जाता है. कजरा, जाला, एवं उखड़ा, रोग, कीट मकौड़े के चलते खेतों में जैसे ही पौधे का अंकुरण शुरू होता है की उसपर कीट मकौड़े का प्रभाव शुरू हो जाता है. कीट मकौड़े के प्रभाव से खेतों में पौधे नहीं उगना, पौधा सुखना, उत्पादन में कमी आना, जैसे कई समस्या उत्पन्न होती है.
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