जल्दबाजी से बिगड़ा नाव का संतुलन

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नाव हादसा . सुल्तानपुर घाट से पंचमहल्ला घाट तक जाने के लिए खुली थी नाव फल्गु नदी पर पुल नहीं रहने से हो रहे हादसे नदी पार कर बड़ी संख्या में ग्रामीण सुल्तानपुर घाट से जाते हैं खिजरसराय जहानाबाद : जिले के मखदुपुर प्रखंड क्षेत्र के सुल्तानपुर और गया जिले के खिजरसराय के बीच बहने […]

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नाव हादसा . सुल्तानपुर घाट से पंचमहल्ला घाट तक जाने के लिए खुली थी नाव

फल्गु नदी पर पुल नहीं रहने से हो रहे हादसे
नदी पार कर बड़ी संख्या में ग्रामीण सुल्तानपुर घाट से जाते हैं खिजरसराय
जहानाबाद : जिले के मखदुपुर प्रखंड क्षेत्र के सुल्तानपुर और गया जिले के खिजरसराय के बीच बहने वाली फल्गू नदी में पानी रहने पर अक्सर हादसे होते हैं. विजयादशमी के दिन नाव हादसे में आठ लोगों की हुई मौत ग्रामीणों में मेला देखने जाने की जल्दबाजी से नाविक के द्वारा संतुलन खो दिये जाने का परिणाम है. नदी पार करने के लिए वहां सिर्फ एक ही नाव की व्यवस्था थी. जबकि एक किनारे से दुसरे किनारे तक जाने -आने वाले लोग बड़ी संख्या में नदी के दोनों किनारे पर मौजूद थे.
विजयादशमी के दिन सुल्तानपुर घाट से खिजरसराय के पंचमहल्ला घाट तक जाने के लिए जब नाव खुली तो उसपर क्षमता से अधिक करीब 40-45 लोग सवार हो गये थे. नाव खिजरसराय की तरफ नदी घाट पर पहुंचने ही वाली थी कि कुछ लोगों ने नाव पर ही अफरा-तफरी मचा दी .मेला में पहुंचने की जल्दबाजी के कारण कई लोग नाव के एक तरफ हो गये.वे लोग घाट पर नाव के लगते ही उतरने को उत्सुक थे.लेकिन संतुलन बिगड़ जाने से नाव नदी में उलट गयी और उस पर सवार आठ बच्चे एवं बच्चियां असमय काल के गाल में समा गये. इस घटना से दशहरे का उत्साह पूरी तरह फीका पड़ गया.
चुकि इस नाव हादसे में दो गांवों के लोगों की मृत्यू हुई है. इस कारण भतनबिगहा और सुकरण बिगहा गांव के अलावे आसपास के अन्य गांवों के भी लोग बड़ी संख्या में नदी घाट पर पहुंच गये थे.
चारों तरफ मातम पसरा था. महिलाओं के चीखने-चिल्लाने का ह्दय विदारक दृश्य देख लोगों का कलेजा मुंह को आ रहा था. इस नाव हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है इसमे प्रियंका और रोहित दोनो सगे भाई-बहन थे. जबकि पूजा और भारती कुमारी सगी बहने थी. घटना की शाम दो शवों को निकाला गया था. जबकि पटना से आयी एसडीआरएफ की टीम ने बुधवार को कड़ी मशक्कत कर अन्य शवों को निकाला. मृतक सभी बच्चे एवं बच्चियां गया जिला के बेलागंज थाना क्षेत्र के निवासी थे.
भाकपा माले की टीम ने किया दौरा : घटना स्थल पर भाकपा माले की एक राज्यस्तरीय टीम वहां पहुंची. टीम में पार्टी के राज्यस्थायी समिति सदस्य महानंद के अलावा रामवली यादव, प्रदीप कुमार, प्रभात कुमार और कमलेश कुमार शामिल थे. घटना का जायजा लेने के बाद वहां से लौटी टीम ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि सुलतानपुर नाव हादसा सरकार, ठेकेदार एवं प्रशासन की लापरवाही की देन है. माले नेताओं ने यह भी कहा है कि विजयादशमी के दिन और पूर्व में हुयी नाव दुर्घटना बालू ठेकेदारों की करतूत का परिणाम है
नेताओं ने अनियंत्रित तरीके से बालू का उत्खनन करने पर रोक लगाने पुल का शीघ्र निर्माण कराने तथा पीडित परिवारों को दस-दस लाख रुपया मुआवजा देने के अलावा बालू माफियाओं पर मुकदमा करने और वहां सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है. उधर जहानाबाद के विधायक मुन्द्रिका सिंह यादव ने नाव दुर्घटना में मृत हुये लोगों के परिजनों को ढाढस बंधाया है उन्होंने घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुये मृतक के परिजनों को सरकार एवं प्रशासन के द्वारा पांच पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है.
दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में लगी थी ग्रामीणों की भीड़
शव के पास लोगों की भीड़ व फल्गु नदी में शव की तलाश करती एसडीआरएफ की टीम.
श्रावणी मेले के वक्त भी हुई थी दुर्घटना
किसी भी विशेष आयोजन के मौके पर खिजरसराय से लोग जहानाबाद के मखदुमपुर वाणावर के इलाके में आते हैं और जहानाबाद से लोग खिजरसराय की ओर जाते हैं. नदी सुखी रहने पर तो स्थिति सामान्य रहती है. लेकिन जब फल्गू नदी में पानी की धार रहती है तब लोगों के समक्ष आवागमन का साधन नाव ही होता है. पिछले वर्ष भी श्रावणी मेले के मौके पर सुलातनपुर के समीप फल्गू नदी में नाव पलट गयी थी खिजरसराय की ओर से लोग श्रावणी मेला देखने वाणावर आ रहे थे
और नाव उलट जाने से पांच लोगों की मृत्यु हो गयी थी. अभी कुछ ही दिनों पूर्व दो अक्टूबर को भी उदेरा स्थान बराज से पूरब और सुलतानपुर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर चार बच्चें की मौत पानी में डूबने से हो गयी थी. इन घटनाओं के पीछे बालू माफियाओं के द्वारा अनियंत्रित तरीके से नदी से बालू का उत्खनन करना भी कहा जाता है. बताया जाता है कि नदी से भारी मात्रा में उक्त घाट के समीप बालू का उठाव किये जाने से काफी गड्ढे हो गयें है.
दो साल से खड़ा है केवल पिलर : सुलतानपुर घाट पर नदी के रास्ते आने जाने का एकमात्र सहारा नाव ही है. उस स्थान पर पुल बनाने की स्वीकृति तो दी गयी है लेकिन अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है. दो साल गुजर गये लेकिन अभी मात्र पिलर का ही निर्माण हुआ है. नदी में पानी भर जाने से वहां प्रशासन के द्वारा देखरेख का कोई खास इंतजाम नहीं होता. लोग राम भरोसे नाव के सहारे नदी पार करते हैं. क्षमता से अधिक लोगों के नाव पर सवार हो जाने से दुर्घटनाएं होती है.
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