गरमी से राहत नहीं, पारा 43 डिग्री के पार

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दुधारू जानवरों पर पड़ रहा गरमी का असर देहाती फ्रिज से आमलोगों की बुझ रही प्यास जहानाबाद : जिले में करीब एक पखवारे से भीषण गरमी से लोग बेहाल हैं. हलक सुखानेवाली पड़ रही गरमी से आदमी-तो-आदमी जानवर भी परेशान है. भीषण गरमी से आम लोगों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है. लोग 10 […]

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दुधारू जानवरों पर पड़ रहा गरमी का असर

देहाती फ्रिज से आमलोगों की बुझ रही प्यास
जहानाबाद : जिले में करीब एक पखवारे से भीषण गरमी से लोग बेहाल हैं. हलक सुखानेवाली पड़ रही गरमी से आदमी-तो-आदमी जानवर भी परेशान है. भीषण गरमी से आम लोगों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है. लोग 10 बजे के पहले ही बाहरी कामकाज का निबटारा करना मुनासिब समझते हैं. दस बजे के बाद आसमान से निकली तीखी धूप पड़ते ही लोगों के शरीर में जलन पैदा कर देती है. गरम व तेज पछुआ हवा के कारण आम लोग अपने घरों में दुगके रहने में भलाई समझते हैं. वहीं, मजबूरी में निकले लोग पूरी तरह गमछे से मुंह-नाक ढक कर घर से बाहर निकल रहे हैं.
बुधवार को भी पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया.
दुधारू जानवरों पर पड़ रहा असर : गरमी का असर दुधारू जानवरों पर पड़ रहा है. अधिक गरमी का असर सबसे ज्यादा भैंस पर पड़ रहा है. तपिश की वजह से भैंस-गाय सुबह आठ बजे के बाद ही हांफना शुरू कर देती हैं वही पशुपालक बचाव के लिए सुबह-शाम जानवरों की पानी से धुलाई कर रहे हैं.
आहर तालाब के सूखने से हो रही परेशानी : ग्रामीण क्षेत्रों में आहर व तालाब के सूखने से गांव के मवेशी पालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. तपती धरती के कारण गांव के जलस्त्रोत, तालाब, आहर, पईन के पानी सूख गये हैं. पानी सूखने के कारण लगातार जल स्तर गिरते जा रहा है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को जानवरों को पानी पिलाने या धुलाई करने के लिए दूर-दूर से माथे पर पानी लाना पड़ रहा है. पानी की कमी की वजह से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
हैंडपंप दे रहा है जवाब : जिले में लगातार गिर रहे जल स्तर के कारण अधिकतर हैंडपंप कड़ा चलना शुरू हो गया है. ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर घरों का चापाकल सुबह शाम चलना शुरू हो गया है.
कई चापाकल जवाब दे दिया है. जिले के पिंजौर, शाहपुर, अमैन, शकुराबाद सहित कई जगहों पर उपरी वाटर लेवल के हैंडपंप महिनो से पानी देना बंद कर दिया है.
देहाती फ्रिज से बूझ रहे प्यास : सदियों से लोगों के प्यास बुझाता आ रहा है मिट्टी के बरतन. सुराही, घड़ा से लोगों का आज भी पयास बुझ रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति अपना प्यास बुझाने के लिए देहाती फ्रिज का इस्तेमाल कर रहे हैं. वही आर्थिक रूप से सुदृढ़ लोग इलेक्ट्रॉनिक फ्रीज का इस्तेमाल कर गला को तर बतर कर प्यास बुझा रहे है.
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