मौसम की बेरुखी झेल रहे किसानों का हो रहा बुरा हाल

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किसानों को राहत देने वाले कृषि विभाग की लगभग सभी योजनाएं कछुएं की चाल में ही चलती हैं. इसका खामियाजा किसानों को लंबे समय से भुगतना पड़ रहा है. विगत दो वर्षों से मौसम की बेरुखी एवं प्रकृति की मार से किसानों की स्थिति बिल्कुल दयनीय हो गयी है. महुआ नगर : महुआ में इन […]

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किसानों को राहत देने वाले कृषि विभाग की लगभग सभी योजनाएं कछुएं की चाल में ही चलती हैं. इसका खामियाजा किसानों को लंबे समय से भुगतना पड़ रहा है. विगत दो वर्षों से मौसम की बेरुखी एवं प्रकृति की मार से किसानों की स्थिति बिल्कुल दयनीय हो गयी है.

महुआ नगर : महुआ में इन दिनों किसानों की स्थिति काफी खराब है. विगत दो वर्षों से मौसम की बेरुखी एवं प्रकृति की मार से किसानों की स्थिति दयनीय हो गयी है. दो वर्षों से पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेतों में नमी बिल्कुल समाप्त हो गई है. इससे किसानों द्वारा लगायी जाने वाली फसलें घाटे का सौदा साबित हो रही हैं.
नमी के घटने से अन्य फसलों काे भी नुकसान : खेतों में नमी नहीं होने की वजह से एक के बाद दूसरी फसलों को भी नुकसान हो रहा है. महाजनों से कर्ज लेकर की गयी खेती में किसान महाजन का ऋण क्या भरेंगे, ऊपर से पेट चलाना भी मुश्किल हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद संभालते ही डीजल अनुदान देने की घोषणा की थी, लेकिन पदाधिकारी व कर्मचारियों की किसानों के प्रति उदासीनता के कारण यह योजना भी टांय-टांय फीस होकर रह गयी है.
गेहूं की कटनी खत्म होने पर है, लेकिन नहीं मिला अनुदान : गेहूं की कटनी भी अंतिम चरण में है, लेकिन अब तक महुआ के किसानों को डीजल अनुदान का लाभ नहीं मिला है. डीजल अनुदान के साथ-साथ इस वर्ष बीज वितरण का भी वहीं हश्र हुआ. मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना से बीज लेने वाले किसानों को अनुदान राशि आज तक खाते में नहीं भेजी गयी, जबकि कृषि विभाग के पदाधिकारियों-कर्मियों द्वारा सभी कागजी प्रक्रिया की गयी थी.
कृषि विभाग की योजनाओं का हाल भी बदतर : महुआ में किसानों को राहत देने वाले कृषि विभाग की लगभग सभी योजनाएं काफी धीमी गति से चलती हैं, जिसका खामियाजा किसानों को लंबे समय से भुगतना पड़ रहा है. स्थानीय किसानों का कहना है कि संबंधित कर्मचारी व पदाधिकारी को जब भी कहा जाता है, तो वह नियम व कानून का हवाला देकर अपना हाथ खड़ा कर लेते हैं. लोगों ने मुख्यमंत्री से किसानों की समस्या पर गौर करते हुए कृषि योजनाओं में बरती जाने वाली त्रुटियों को दूर कर किसानों को उनका उचित हक दिलाने की गुहार लगायी है.
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