मरीजों की संख्या को देखते हुए बढ़ायी गयी बेडों की संख्या
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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जहानाबाद नगर : शराब पीने से कैसा महसूस होता है, आपके आस-पास कोई शराब पीता है जो आपको शराब पीने के लिए मजबूर करता है, अब जबकि शराब नहीं मिल रहा है तो क्या परेशानी हो रही है. ऐसे दस सवाल नशा मुक्ति केंद्र में इलाज कराने आने वाले मरीजों से पूछा जा रहा है. […]
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जहानाबाद नगर : शराब पीने से कैसा महसूस होता है, आपके आस-पास कोई शराब पीता है जो आपको शराब पीने के लिए मजबूर करता है, अब जबकि शराब नहीं मिल रहा है तो क्या परेशानी हो रही है.
ऐसे दस सवाल नशा मुक्ति केंद्र में इलाज कराने आने वाले मरीजों से पूछा जा रहा है. मरीजों द्वारा दिये जाने वाले जवाब के आधार पर ही उनकी ग्रेडिंग कर इलाज आरंभ की जा रही है. यह नजारा सदर अस्पताल में बने नशामुक्ति केंद्र में देखने को मिल रहा है. इलाज कराने आने वाले शराबियों को उनके जवाब के आधार पर ही उनका इलाज तथा काउंसलिंग किया जा रहा है. नशामुक्ति केंद्र में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.
अब तक 30 मरीजों का इलाज हो चुका है. जिले में शराब के आदि हो चुके लोगों की सेहत सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाया जा रहा है. शराब की लत छुड़ाने के लिए नशामुक्ति केंद्र में उनका बेहतर इलाज कराया जा रहा है. सदर अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र को 20 बेड का बना दिया गया है. ताकि यहां आने वाले मरीजों को बेड के अभाव में इलाज में परेशानी नहीं हो. हालांकि अब तक जितने भी मरीज आये हैं उन सभी का इलाज आउटडोर में ही किया गया है. किसी भी मरीज को इनडोर में भरती नहीं किया गया है. नशामुक्ति केंद्र में आने वाले मरीजों के लिए काउंसलिंग की बेहतर व्यवस्था का अच्छा परिणाम देखा जा रहा है कई मरीजों की लत छूटने लगी है.
सरकार द्वारा पूर्ण शराबबंदी लागू किये जाने के बाद इसे सफल बनाने और शराब की आदत छुड़ाकर शराबियों को स्वस्थ और सामान्य बनाने के उद्देश्य से सदर अस्पताल में करीब दस लाख की लागत से नशा मुक्ति केंद्र बना था. जिसमें दस बेड की व्यवस्था की गयी थी. हालांकि मरीजों की संभावित संख्या को देखते हुए डी-एडिक्शन सेंटर में बेडों की संख्या बढ़ाकर बीस कर दिया गया है. यहां प्रतिदिन कोई न कोई मरीज इलाज कराने पहुंच रहा है.
बढ़ायी गयी बेडों की संख्या-
शराब छुड़ाने के लिए इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेडों की कमी से जुझना न पड़े इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर सदर अस्पताल में दस बेड वाले डी-एडिक्शन सेंटर में बेडों की संख्या दोगुनी कर दी गयी है. इसके साथ ही केंद्र में चिकित्सा पदाधिकारी भी प्रतिनियुक्त किये गये हैं ताकि मरीजों की इलाज में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो. केंद्र में आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध हैं. जिससे बेहतर इलाज संभव हो पा रहा है.
क्या कहते हैं अधिकारी
सदर अस्पताल में दस बेड वाले नशामुक्ति केंद्र को बीस बेड का बना दिया गया है. ताकि मरीजों के इलाज में कठिनाई न हो. डी-एडिक्शन सेंटर में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है. नशामुक्ति के लिए मरीजों को इलाज के साथ ही काउंसलिंग की भी व्यवस्था की गयी है.
डा विद्याभूषण प्रसाद, नोडल पदाधिकारी, नशामुक्ति केंद्र
सदर अस्पताल में बने नशामुक्ति केंद्र में इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या दिन व दिन बढ़ती जा रही है. एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक तीस मरीजों का इलाज किया गया है.
सभी मरीजों का इलाज आउटडोर में ही किया गया है. एक अप्रैल को दो मरीज इलाज कराने पहुंचे थे. उसके बाद कई दिनों तक कोई भी मरीज इलाज कराने नहीं पहुंचा लेकिन हाल के दिनों में यहां आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. एक अप्रैल से शराबबंदी के मद्देनजर खोले गये नशामुक्ति केंद्र के बारे में जैसे -जैसे लोगों को जानकारी हो रही है. मरीजों की पहुंचने की तादाद बढ़ती जा रही है.
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