मनरेगा का हाल बेहाल, रोजगार के लिए भटक रहे कामगार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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एक लाख 37 हजार जॉब कार्डधारियों में 23,400 को मिला काम अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने का दावा फेल चालू वित्तीय वर्ष में मात्र 110 योजनाएं हुई पूरी जहानाबाद नगर : जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा का हाल बेहाल है . यहा मनरेगा के 84 फीसदी जॉब कार्डधारक रोजगार को तरस रहे […]
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एक लाख 37 हजार जॉब कार्डधारियों में 23,400 को मिला काम
अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने का दावा फेल
चालू वित्तीय वर्ष में मात्र 110 योजनाएं हुई पूरी
जहानाबाद नगर : जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा का हाल बेहाल है . यहा मनरेगा के 84 फीसदी जॉब कार्डधारक रोजगार को तरस रहे हैं . इस साल 1.37 लाख जॉब कार्डधारियों में से सिर्फ 23,400 मजदूरों को ही काम मिल पाया है. ऐसे में मनरेगा से अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने का प्रशासनिक दावा फेल साबित हो रहा है. ताजा सूरत-ए-हाल ऐसी है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है.
चालू वित्तीय वर्ष में सिर्फ 110 योजनाएं ही पूरी हो सकी है. मनरेगा के गिरते ग्राफ पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष में शासन – प्रशासन की ओर से सुधार के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं. लेकिन अफसरों की तमाम कोशिशों के बावजूद एक लाख 15 हजार कार्डधारक रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. जमीनी हालात यह है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 में 38,675 मजदूरों को रोजगार दिया गया था. 2012-13 में 35,355, तो 2013-14 में 25,657 परिवारों को रोजगार दिया गया. 2014-15 में यह संख्या घटकर 17,753 हो गई. वर्तमान वित्तीय वर्ष में गत वर्ष की तुलना में थोड़ा बेहतर परिणाम देखने को मिल रहा है.
इस वित्तीय वर्ष में अबतक 23,400 लोगों को रोजगार दिया गया है. वर्ष 2011-12 में यहां 11.15 लाख मानव दिवस सृजित किए गए थे.वहीं 2012-13 में 12 लाख 14 हजार, वर्ष 2013-14 में आठ लाख 30 हजार, 2014-15 में 8 लाख,22 हजार मानव दिवस का सृजन किया गया. वर्तमान माह में गत वर्ष के आंकड़े से थोड़ा सुधार हुआ है .
वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक 8 लाख 90हजार मानव दिवस का सृजन किया गया है. योजनाओं को पूर्ण करने में यह साल बिलकुल फिसड्डी साबित हो रहा है. 2011-12 में जहां 1310 योजनाएं पूरी की गयी थी. वहीं 2012-13 में 972, 2013-14 में 2735,2014-15 में 1440 योजनाएं पूर्ण की गई थी. वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक मात्र 110 योजनाएं ही पूर्ण हो सकी है. वहीं मनरेगा के तहत अपने गांव पंचायत में रोजगार की आस लगाए कामगार अब काम नहीं मिलने से छोटे शहरों से लेकर मुख्यालय तक भटक रहे हैं.
गांव से जारी है पलायान :मनरेगा में काम नहीं मिलने के बाद फिर से अकुशल श्रमिक पलायन को विवश हैं. गांव में मजदूरों को कृषि कार्य में कुछ दिनों तक तो काम का जुगाड़ हो जाता है, लेकिन इससे परिवार चलाना उनके लिए सहज नहीं होता. इसके कारण काफी संख्या में मजदूर अभी भी काम की लताश में बाजर जा रहे हैं .पहले से देश-प्रदेश के बड़े शहरों में कमानेवाले लोगों के गांव आते ही उन पर साथ ले चलने व कामकाज दिलाने के लिए सामाजिक तौर पर दबाव बनाया जाता है.
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