जहानाबाद सदर. प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन एवं लोहिया स्वच्छ बिहार मिशन के तहत घर-घर से कचरा उठाव का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है. सरकार की ओर से इसके लिए प्रत्येक घर से मात्र 30 रुपये प्रतिमाह शुल्क निर्धारित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण इस राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं. इसका सीधा असर कचरा प्रबंधन व्यवस्था और स्वच्छता अभियान की निरंतरता पर पड़ रहा है. प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद वर्तमान में केवल 25 से 30 प्रतिशत लोग ही कचरा उठाव शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक लोग निर्धारित राशि देने से बच रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन कचरा उठाव की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद शुल्क वसूली में आ रही यह कमी प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गयी है. लोहिया स्वच्छ बिहार मिशन के तहत प्रत्येक पंचायत के हर वार्ड में रोजाना घर-घर जाकर कचरा संग्रह किया जा रहा है. इसके लिए ठेला, पैडल रिक्शा, डस्टबिन सहित अन्य संसाधनों की व्यवस्था की गई है. कचरे को डंपिंग जोन तक पहुंचाने के लिए मानव संसाधन और वाहनों पर सरकार को हर माह अच्छी-खासी राशि खर्च करनी पड़ रही है. लेकिन जब तय शुल्क की वसूली नहीं हो पाती है, तो इस पूरे सिस्टम के रखरखाव में परेशानी सामने आने लगती है. इस संबंध में बीडीओ अनिल मिस्त्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर से केवल 30 रुपये प्रतिमाह शुल्क निर्धारित किया गया है. इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया है. बावजूद इसके अभी केवल 30 प्रतिशत लोग ही शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, जबकि 70 प्रतिशत लोग बिल्कुल भी राशि नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए आम लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है. जल्द ही फिर से व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग कचरा उठाव शुल्क जमा करें और स्वच्छ बिहार के लक्ष्य को साकार किया जा सके.
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