मां के आंसू और पिता के गर्व के बीच 581 बेटियां बनीं बिहार पुलिस का हिस्सा
दीक्षांत परेड के दौरान सलामी लेते मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआईजी राकेश कुमार।
Women Police Passing Out Parade: जमुई जिले के मलयपुर पुलिस लाइन में आयोजित दीक्षांत परेड समारोह भावनाओं, संघर्ष और सफलता का अद्भुत संगम बन गया. कठिन प्रशिक्षण और अथक मेहनत के बाद 581 महिला प्रशिक्षु बिहार पुलिस की नियमित सेवा का हिस्सा बनीं. परेड मैदान में जहां महिला जवानों की दमदार कदमताल गूंज रही थी, वहीं दूसरी ओर परिजनों की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू छलक रहे थे. यह समारोह सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि बेटियों के सपनों के साकार होने का ऐतिहासिक क्षण बन गया.
जमुई (बरहट) से शशिलाल की रिपोर्ट
Women Police Passing Out Parade: मलयपुर पुलिस लाइन में शनिवार को सिर्फ एक पासिंग आउट परेड नहीं हुई, बल्कि संघर्ष, सपनों और त्याग की ऐसी कहानी लिखी गई जिसने हर आंख नम कर दी. किसी बेटी ने खाकी पहनकर मां को गले लगाया तो किसी ने पिता के चरणों में झुककर उनका आशीर्वाद लिया. कई बेटियों ने अपने पिता के सिर पर पुलिस की टोपी सजाकर उनके वर्षों के संघर्ष को सम्मान दिया. 581 महिला प्रशिक्षुओं की यह दीक्षांत परेड भावनाओं, गर्व और महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बन गई.
581 महिला प्रशिक्षु बनीं बिहार पुलिस का हिस्सा
इस पासिंग आउट परेड में बेगूसराय की 289, मुंगेर की 171 और बांका की 121 महिला प्रशिक्षु शामिल रहीं. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी जवानों ने बिहार पुलिस का बैज धारण किया और संविधान के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्य पालन की शपथ ली. समारोह में बड़ी संख्या में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे.
पिता के निधन के बाद मां ने संभाला सपना
सिवान की गीता कुमारी की कहानी ने समारोह को और भावुक बना दिया. तीन वर्ष पहले पिता के निधन के बाद उनकी मां और मामा सुजीत सिंह ने कठिन परिस्थितियों में उनका साथ दिया. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने गीता का हौसला बनाए रखा. पासिंग आउट परेड के बाद मां से मिलते ही गीता भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.
खेती-बाड़ी करने वाले पिता का सपना हुआ पूरा
बक्सर की नीलू कुमारी की सफलता भी संघर्ष की मिसाल रही. किसान पिता धर्मेंद्र सिंह ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में बेटी को पढ़ाया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई. वर्दी पहनने के बाद नीलू सबसे पहले अपनी मां के चरणों में झुक गईं. यह दृश्य देखकर समारोह में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं.
पिता के सिर पर सजाई पुलिस की टोपी
गया जिले की सिंधु कुमारी के लिए यह दिन जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया. परेड समाप्त होने के बाद उन्होंने अपनी पुलिस टोपी पिता लालदेव यादव के सिर पर रख दी. यह सिर्फ एक टोपी नहीं थी, बल्कि पिता के संघर्ष, त्याग और प्रेरणा को दिया गया सम्मान था. मां-बेटी और पिता-पुत्री का यह भावुक मिलन समारोह की सबसे यादगार तस्वीर बन गया.
महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर
मुख्य अतिथि डीआईजी राकेश कुमार ने कहा कि बिहार पुलिस में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर पेश करती है. नई महिला जवानें कानून व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ समाज में प्रेरणा का स्रोत भी बनेंगी.
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