जल, जंगल, जमीन व पशुधन हैं गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़

Updated at : 28 May 2024 10:06 PM (IST)
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जल, जंगल, जमीन व पशुधन हैं गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़

गांवों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर प्रखंड में चलाया जा रहा जागरूकता अभियान

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लक्ष्मीपुर. गांव आत्मनिर्भर कैसे हो. इसको लेकर नेचर विलेज मटिया के बैनर तले एक जागरूकता अभियान प्रखंड में एक सप्ताह से चलाया जा रहा है. इसकी अगुआई करते हुए नेचर विलेज मटिया के संस्थापक प्रखंड में रहे पूर्व सीओ निर्भय प्रताप सिंह प्रखंड के कई गांवों में ग्रामीणों के साथ बैठक कर लोगों को इसकी जानकारी दे रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने मटिया पंचायत के आदर्श टोला में बैठक की. इसमें गांव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गयी. इसमें शिक्षा, स्वास्थ, कृषि, स्वच्छता, पर्यावरण, तथा योगा आदि पर चर्चा हुई. बैठक को संबोधन करते हुए पूर्व सीओ निर्भय प्रताप सिंह ने कहा कि गांव तभी आत्मनिर्भर होगा, जब ग्रामीण गांव के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करेंगे. उन्हें अपने दायित्व का निर्वहन करना पड़ेगा. सभी कार्य को सरकार के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए. सरकार गांव के विकास के लिए कई तरह को योजनाएं चला रही है. इन सबों में लोगों को सहयोग करने की जरूरत है. गांव आपका है आपकी मातृभूमि है इसका ध्यान आपको रखना है. उन्होंने कहा सबसे पहले लोगों को शिक्षित होना जरूरी है. इसके लिए बच्चों को सही समय पर नियमित स्कूल भेजें. बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक ने निवेदन करें. इसके अलावे स्वास्थ्य के प्रति भी सजग होना पड़ेगा. इसके लिए योग करना जरूरी है. योग से कई बीमारी को ठीक किया जा सकता है. कई विद्यालयों में नेचर विलेज ने योग शिविर भी लगाया है. योग के साथ-साथ घर को भी साफ सुथरा रखना जरूरी है. घर तथा घर के आस पास हमेशा साफ रखें. कचरा जहां तहां नहीं फेकें. शौचालय का प्रयोग करें. उन्होंने कहा गांव आत्मनिर्भर बने इसके लिए अर्थव्यवस्था की रीढ़ जल, जंगल, जमीन तथा पशुधन है. इसका संरक्षण करना होगा. किसान परंपरागत खेती से हटकर मानसून के अनुसार खेती करें, जिस जमीन में सिंचाई की समस्या है वैसे जमीन में फल तथा इमारती लकड़ी के पौधों को लगाएं. जो पर्यावरण के सुधार के साथ-साथ आने वाले पीढ़ी के लिए एक आय का साधन बन सके. इसके लिए हमलोगों ने अगले वर्ष तक एक लाख पौधा लगाने का लक्ष्य रखा है. इस बैठक के अलावे नेचर विलेज मटिया द्वारा हरला, मेदनीपुर, गुरिया, नजारी, आनंदपुर, चिंबेरिया, दिघरा, दोनहा आदि गांव में भी इन सभी मुद्दों को लेकर बैठक की गयी है

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