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वर्षा जल संरक्षित कर जल संकट को कर सकते हैं कम

Updated at : 11 Aug 2024 10:12 PM (IST)
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वर्षा जल संरक्षित कर जल संकट को कर सकते हैं कम

जल संचयन को लेकर चलाया जागरूकता अभियान

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जमुई. वर्तमान में मानसून आने पर बेकार बहते पानी के संचयन के बारे में कोई नहीं सोचता है और इसे नजरअंदाज करते जा रहे हैं. नतीजा यह होता है कि आगामी गर्मी वाले मौसम में हमें जल संकट की भयावह स्थिति झेलनी पड़ेगी. इसी को देखते हुए साइकिल यात्रा एक विचार मंच के युवाओं ने नगर परिषद क्षेत्र के शीतला कॉलोनी मुहल्ले में जल संचयन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया. तीन दर्जन से अधिक पौधाें का रोपन कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया. मौके मंच के सदस्य शैलश भारद्वाज एवं कोचिंग संचालक बमबम कुमार ने बताया कि देश की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को पानी की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लोग आधुनिक एवं आरामदायक जिंदगी जीने के लिए कुआं और चापाकल को छोड़कर मोटर द्वारा पानी ले रहे हैं और जरूरत से ज्यादा निकाल कर पानी बर्बाद भी करते हैं. गर्मी के मौसम में भागते जलस्तर को भूल कर हम परेशान होते, पर इस मानसून में जल के संचयन के बारे में नहीं सोचते हैं. यदि बरसात का पानी का संचयन पास के गड्ढे, तालाब, नदी या नहर की ओर कर दें तो पानी संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए सोख्ता भी लाभदायक होता है इसके साथ इस मानसून में पौधरोपण करना भी प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ जल संचयन के लिए मददगार साबित होता है. राहुल राठौर ने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 75 फीसदी मकानों में पानी की सप्लाई नहीं है. चेतावनी के तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि देश में वर्ष 2030 तक पानी की किल्लत और भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. इसी के बचाव के लिए हमें जल संचयन और पौधरोपण करना चाहिये. मौके पर मंच के गोलू कुमार, हर्ष कुमार सिन्हा, राकेश कुमार, सीपू सिंह परिहार, हैप्पी आनंद भारद्वाज, शैलेश भारद्वाज, लड्डू मिश्रा, विवेक कुमार, मन्नू कुमार, राज पांडे, रोशन कुमार, अमन सिंह चंदेल, सूरज कुमार, राजीव रंजन, राहुल राठौर, सहित कई छात्र उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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