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तमकुलिया में कई महीनों से बंद है स्कूल, 80 बच्चों का भविष्य अंधेरे में

Updated at : 16 Nov 2025 8:55 PM (IST)
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तमकुलिया में कई महीनों से बंद है स्कूल, 80 बच्चों का भविष्य अंधेरे में

तमकुलिया गांव में शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. प्रखंड मुख्यालय से महज 2.5 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बहुल तमकुलिया गांव में पिछले कई महीनों से स्कूल बंद है.

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बरहट . तमकुलिया गांव में शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. प्रखंड मुख्यालय से महज 2.5 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बहुल तमकुलिया गांव में पिछले कई महीनों से स्कूल बंद है. गांव में कल्याण विभाग की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालय तमकुलिया कभी बच्चों के भविष्य की नींव था, लेकिन जर्जर भवन होने से कई स्कूल बंद है. स्कूल के बेंच-डेस्क पर धूल जमी है और कभी गूंजने वाली बच्चों की आवाजें अब खामोशी में बदल चुकी हैं.

45 वर्षों से चल रहा था स्कूल, आज बच्चे घरों में कैद

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1976 में खुला यह विद्यालय 80 से अधिक बच्चों की पढ़ाई का केंद्र था. लेकिन शिक्षक महीनों तक स्कूल नहीं पहुंचे और धीरे-धीरे विद्यालय ने दम तोड़ दिया. अब बच्चे मजबूरन घर में ही रहने को विवश हैं. दो किलोमीटर दूर स्थित दूसरे विद्यालय तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क पार करनी पड़ती है, जो छोटे बच्चों के लिए जोखिम भरा है. नतीजतन अधिकांश बच्चे स्कूल जाना छोड़ चुके हैं.

ग्रामीणों का आक्रोश—हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो

प्रभात खबर की टीम जब तमकुलिया पहुंची, तो ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखाई दी. कृष्णा हेंब्रम, सुप्रभा देवी, किरण देवी, मुन्नी देवी, सुगदेव चौड़े, लाखन सोरेन और बिरजू तुरी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने एकजुट होकर मांग की कि गांव में तत्काल स्कूल की पढ़ाई बहाल की जाये. ग्रामीणों ने बताया कि गांव के मुंशी किस्कू ने राज्यपाल के नाम जमीन दान देकर बच्चों की शिक्षा का रास्ता खोला था. इसी विद्यालय से पढ़कर कई युवा आज सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं. ग्रामीणों ने कहा कि हमें सुविधा नहीं, सिर्फ बच्चों के लिए शिक्षा चाहिए.

सरकार कार्रवाई करे, नहीं तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय होगा

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि सरकार चाहे तो किसी भी योजना में कटौती करे, लेकिन बच्चों की शिक्षा पर किसी तरह की चोट नहीं होनी चाहिए. गांव में स्कूल दोबारा खुलना अत्यंत आवश्यक है ताकि अगली पीढ़ी का भविष्य अंधेरे में न डूबे.

कहते हैं पदाधिकारी

इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी एसके पांडेय ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में है. जल्द ही विद्यालय का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी. उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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