सदर अस्पताल : सुधा डेयरी बूथ बना टी-स्टाॅल व जनरल स्टोर

जिम्मेदार बने हुए हैं उदासीन
जमुई. सदर अस्पताल परिसर में व्यवस्था सुधार के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. एक तरफ जहां दो दिन पूर्व बिचौलियों के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए जीविका की ओर से संचालित ””पोषण वाटिका सह एनपीएम शॉप”” को आनन-फानन में हटवा दिया गया. वहीं दूसरी ओर परिसर में स्थित सुधा डेयरी स्टॉल नियमों को ताक पर रखकर सरेआम चाय, कुरकुरे, चिप्स और यहां तक कि सेनिटरी पैड बेच रहा है.
दूध के नाम पर सबकुछ उपलब्ध
नियमतः सुधा डेयरी स्टॉल को केवल दुग्ध उत्पादों की बिक्री के लिए अधिकृत किया जाता है, लेकिन अस्पताल परिसर स्थित इस बूथ का नजारा कुछ और ही स्थिति बयां कर रहा है. यहां मरीजों और उनके परिजनों को दूध-दही मिले न मिले, लेकिन चाय की चुस्कियों के साथ चिप्स और कुरकुरे आसानी से उपलब्ध हैं. हैरानी की बात यह है कि इस अवैध जनरल स्टोर के संचालन पर अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है.
दोहरा मापदंड जीविका पर कार्रवाई, सुधा के स्टॉल पर मेहरबानी
दो दिन पहले ही प्रशासन ने यह तर्क देते हुए जीविका की दुकान हटवायी थी कि वहां बिचौलियों का जमावड़ा लगता है. अब सवाल यह उठता है कि क्या सुधा डेयरी के इस स्टॉल पर होने वाली व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के दायरे में हैं. आखिर किन परिस्थितियों में डेयरी स्टॉल को चाय और अन्य सामान बेचने की अनुमति दी गयी है. क्या इस अवैध संचालन को पर्दे के पीछे से संरक्षण प्राप्त है.
मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता पर सवाल
अस्पताल परिसर में सरेआम चाय बनाने और खाद्य सामग्री बेचने से गंदगी और संक्रमण का खतरा भी बना रहता है. जीविका जैसी संस्था, जो महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और पोषण के क्षेत्र में काम करती है, उसे हटाकर एक निजी मुनाफे वाले स्टॉल को मनमानी की छूट देना प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाता है. अस्पताल की व्यवस्था को बिचौलियों से मुक्त करने का दावा तब तक खोखला है, जब तक नियमों का पालन सभी के लिए समान न हो. सुधा डेयरी स्टॉल का जनरल स्टोर में बदलना प्रशासन की दोहरी नीति को दर्शाता है.
कहते हैं सिविल सर्जन
इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सुधा डेयरी स्टॉल के संचालक को नोटिस दिया गया है. कहा गया है कि सुधा डेयरी स्टॉल पर सिर्फ सुधा से संबंधित सामान की बिक्री करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
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