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निष्पक्षता, स्वतंत्रता, सत्यता व विश्वसनीयता पत्रकारिता की आत्मा

Updated at : 16 Nov 2024 7:39 PM (IST)
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निष्पक्षता, स्वतंत्रता, सत्यता व विश्वसनीयता पत्रकारिता की आत्मा

जनमत का निर्माण, सत्ता पर निगरानी और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण

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जनमत का निर्माण, सत्ता पर निगरानी और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण जमुई. प्रेस दिवस के मौके पर शनिवार को नगर परिषद स्थित मीना कुंज संवाद कक्ष में स्वतंत्र-निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता विषय पर वरिष्ठ शिक्षक दिनेश मंडल की अध्यक्षता में परिचर्चा हुई. मौके पर डॉ प्रो गौरीशंकर पासवान ने कहा कि भारत में हर वर्ष 16 नवंबर को प्रेस दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य मीडिया से जुड़े लोगों को यह याद दिलाना होता है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता जनतंत्र के लिए एक आवश्यक स्तंभ है. निष्पक्षता, स्वतंत्रता, सत्यता और विश्वसनीयता पत्रकारिता की आत्मा है. इस दिन को प्रेस की स्वतंत्रता और उसके महत्व को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है. यह दिवस उन चुनौतियों को भी याद दिलाता है, जिनका सामना पत्रकार करते हैं. यह दिवस यह भी सुनिश्चित करता है कि मीडिया को बिना किसी दबाव के सत्य और न्याय के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिये. क्योंकि यह देश और समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सच्चाई एवं जागरूकता का प्रकाश आलोकित करता है. मीडिया मानवता को जोड़ने व उसकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इतना ही नहीं यह हमें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से अवगत कराता है. इससे हम अपने आसपास की दुनिया से जुड़े रहते हैं. अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का प्रहरी है. प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों का देश के लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है. मीडिया को समाज में सच्चाई और न्याय की स्थापना के लिए हंस की तरह नीर क्षीर विवेकी और न्यायाधीश की तरह निष्पक्ष, तटस्थ तथा तथ्यात्मक भूमिका निभानी चाहिये. मीडिया सिर्फ सूचनाओं का प्रसार ही नहीं करता, बल्कि यह जनमत का निर्माण, सत्ता पर निगरानी और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अधिवक्ता रामचंद्र रविदास ने कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है. बदलते समय के साथ प्रेस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. जैसे फेक न्यूज और गलत सूचनाओं का प्रसार, प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला, पत्रकारों की सुरक्षा आदि प्रमुख मुद्दे एवं चुनौतियां हैं. आज सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ा है. फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब खबरों के प्रसार को लोकतांत्रिक बना दिया है. शिक्षक दिनेश मंडल ने कहा कि मीडिया जनता की आवाज होता है, क्योंकि मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो जनता की आवाज और समस्याओं को सरकार तक और सरकार की नीति व योजनाओं को जनता तक पहुंचता है. उन्होंने प्रेस के महत्व को बताते हुए कहा कि जो देखे वही बताएं, सच्चा पत्रकार वही कहलाये, सत्य का प्रचार मीडिया का व्यापार है. प्रेस को बदलते समय के साथ खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखना होगा. मौके पर प्रो डॉ डीके गोयल, प्रो सरदार राम, प्रो संजीव कुमार सिंह,शिक्षक मंटू पासवान, श्याम सुंदर, रवीश कुमार सिंह, सुशील कुमार, सुनील कुमार, विपुल कुमार, अतुल कुमार आदिकई बुद्धिजीवी और छात्र उपस्थित थे.

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