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2025 तक जमुई पूर्ण रूप से होगा टीबी मुक्त

Updated at : 22 May 2024 9:58 PM (IST)
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2025 तक जमुई पूर्ण रूप से होगा टीबी मुक्त

यक्ष्मा के रोकथाम को लेकर चिकित्सकों को दिया प्रशिक्षण

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जमुई. सदर अस्पताल परिसर स्थित सभाकक्ष में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत यक्ष्मा की रोकथाम को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. शिविर में राज्य यक्ष्मा विभाग की छह सदस्यीय टीम ने जिले को यक्ष्मा मुक्त बनाने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी. इसके साथ ही जिले के सभी निजी क्लिनिक के चिकित्सक को टीबी के लक्षणों वाले मरीजों की पहचान कर उसे जांच के लिए सदर अस्पताल भेजने का निर्देश दिया गया. सिविल सर्जन डॉ कुमार महेंद्र प्रताप ने बताया कि सरकार द्वारा 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार के दिशा-निर्देश के आलोक में जिले में टीबी मरीजों की पहचान, उपचार के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2025 तक जमुई जिला पूर्ण रूप से टीबी मुक्त होगा. शिविर में डीएस डॉ सैयद नौशाद अहमद, अस्पताल प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय, डॉ अंजनी कुमार, डॉ अमीत रंजन, डॉ राजीव रंजन, डॉ अजय कुमार, डॉ शालिनी, डॉ स्निग्धा सहित अन्य चिकित्सक मौजूद थे.

टीम ने की टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा:

राज्य यक्ष्मा मुख्यालय पटना से आयी छह सदस्यीय टीम ने बुधवार को जिले में चल रहे राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम की गहन समीक्षा की. समीक्षा के दौरान राज्य टीबी सेल के डॉ रविशंकर ने बताया कि 2025 तक यक्ष्मा मुक्त जिले की घोषणा के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करना सुनिश्चित करें. उन्होंने जिले के सभी प्रखंडों में चल रहे कार्यक्रम की सूचकांकों पर प्रखंडवार चर्चा की. इसके साथ ही कमतर प्रदर्शन वाले प्रखंड को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. मौके पर सिविल सर्जन, डॉ कुमार महेंद्र प्रताप, एसीएमओ डॉ अरविंद कुमार सहित सभी प्रभारी चिकत्सा पदाधिकारी, हेल्थ मैनेजर एवं टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े सभी कर्मी उपस्थित थे.

टीबी से बचाव के लिए सावधानी जरूरी :

राज्य टीबी सेल के डॉ रविशंकर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बैक्टीरिया शरीर के सभी अंगों में प्रवेश कर रोगग्रस्त कर देता है. यह ज्यादातर फेफड़ों में ही पाया जाता है, लेकिन इसके अलावा आंत, मस्तिक, हड्डियां, गुर्दे, त्वचा, हृदय भी टीबी से ग्रसित हो सकता है. उन्होंने बताया कि टीबी संक्रमण से बचाव को लेकर समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही लोगों को इस बीमारी को लेकर सावधान भी किया जा रहा है. उन्होंने बताया की टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो एक से दूसरे लोगों में फैलती है. यह बीमारी छूने से नहीं फैलती बल्कि टीबी मरीजों द्वारा जहां-तहां थूकने और खांसने से फैलती है. मरीजों को सलाह दी जाती है कि अपने घर या बाहर जहां-तहां ना थूकें. टीबी के मरीज खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल जरूर रखें और लोगों के बीच में रहने पर मास्क का प्रयोग करें. ऐसा करने से टीबी बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है. उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों की संख्या पर्व त्योहार के समय बढ़ जाती है, क्योंकि इस समय बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से लोग घर आते हैं. इस दौरान एक भी व्यक्ति टीबी संक्रमित होने पर कई लोग संक्रमण के दायरे में आ जाते हैं. फिलहाल जिले में टीबी के 353 एक्टिव मरीज हैं.

नियमित दवा सेवन बीमारी का है एकमात्र इलाज:

टीबी बीमारी जानलेवा है लेकिन, नियमित इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है. टीबी से पीड़ित मरीजों का 6 से 12 महीने का इलाज होता है. पीड़ित मरीज लगातार 6 से 12 महीने तक नियमित दवा सेवन करें. इसके साथ थोड़ा परहेज करें और सावधानी बरतें तो टीबी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है. टीबी पीड़ित मरीजों को 6 माह में डाट्स के 76 खुराक दिये जाते हैं, उसके बाद भी ठीक नहीं हुआ, तो दो माह की अतिरिक्त खुराक और दी जाती है. इसे जड़ से मिटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब नया तरीका अपना रहा है. इन माध्यमों से बीमारी पर कंट्रोल किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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