जंगल, झरने, पहाड़ और विशाल जलाशय, पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभर रहा जमुई
JAMUI NEWS:कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाला जमुई अब प्राकृतिक सौंदर्य और इको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है.घने जंगल, पर्वत, झरने और वन्य संपदा पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं.
टूरिज्म:- कभी नक्सली घटनाओं से सुर्खियों में रहने वाला इलाका अब प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बन रहा
जमुई से गुलशन कश्यप की रिपोर्ट:-
जमुई.
बिहार के दक्षिणी छोर पर स्थित जमुई जिला आज अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है. कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में चर्चित रहा यह इलाका अब पर्यटन की अपार संभावनाओं के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. घने जंगल, पर्वतों की लंबी श्रृंखलाएं, प्राकृतिक झरने, विशाल जलाशय और जैव विविधता से समृद्ध वन क्षेत्र जमुई को बिहार के सबसे संभावनाशील पर्यटन जिलों में शामिल करते हैं. पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और विकास योजनाओं के विस्तार के बाद यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है. प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने की चाह रखने वालों के लिए जमुई किसी स्वर्ग से कम नहीं है.जिले की सबसे बड़ी ताकत हैं इसके जंगल
जमुई की पहचान उसके विशाल वन क्षेत्र से है. वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1 लाख 53 हजार 112 एकड़ से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित था. इनमें 71 हजार 566 एकड़ आरक्षित वन भूमि शामिल है, जो जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 20.89 प्रतिशत हिस्सा है. बिहार के अन्य जिलों की तुलना में यह वन क्षेत्र काफी बड़ा है. वर्ष 2026 में जमुई सघन वन क्षेत्र वाले जिलों में पूरे बिहार में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. घने जंगलों के बीच फैली पर्वत श्रृंखलाएं, वन्य जीवों की मौजूदगी और प्राकृतिक हरियाली इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म के लिए बेहद उपयुक्त बनाती हैं. यदि योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जाए तो आने वाले वर्षों में जमुई बिहार का प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र बन सकता है.
गरही डैम बन चुका है जिले के पर्यटन का नया केंद्र
जमुई के पर्यटन की चर्चा गरही डैम के बिना अधूरी है. खैरा प्रखंड में स्थित यह विशाल जलाशय आज जिले का सबसे चर्चित पर्यटन स्थल बन चुका है. हजारों एकड़ में फैले इस डैम के चारों ओर ऊंची-ऊंची पहाड़ियां और हरियाली इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं. यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को किसी हिल स्टेशन जैसा अनुभव होता है. डैम के शांत जल में नौकायन, बांध पर सैर, परिवार के साथ पिकनिक और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता है.
सिंचाई और मत्स्य पालन के लिए भी महत्वपूर्ण
गरही डैम केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि सिंचाई और मत्स्य पालन के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र है. राज्य सरकार भी इसकी संभावनाओं को पहचान चुकी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान यहां ईको-कॉटेज निर्माण को स्वीकृति मिली थी. वहीं हाल ही में यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट निर्माण की घोषणा ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है. इसके बनने के बाद यह पटना के बाद बिहार का दूसरा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट वाला पर्यटन स्थल होगा. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पर्यटन गतिविधियों को और गति मिलेगी.
पंचभूर झरना प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल खजाना
जमुई के गिद्धेश्वर वन क्षेत्र में स्थित पंचभूर झरना प्रकृति का अनूठा उपहार है. बिहार, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं और झरने में स्नान करते हैं. पहाड़ों और जंगलों के बीच स्थित यह स्थल रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है.
सात पर्वत श्रृंखलाओं में छिपा है प्रकृति का अद्भुत संसार
गिद्धेश्वर वन क्षेत्र केवल पंचभूर झरने तक सीमित नहीं है. यह इलाका जमुई, नवादा और झारखंड के गिरिडीह जिले की सीमाओं को जोड़ता है. सात पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है. यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग और एडवेंचर टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. कई ऐसे स्थल हैं जो अब भी आम लोगों की नजरों से दूर हैं, लेकिन प्राकृतिक दृष्टि से बेहद आकर्षक हैं.
संघर्ष से विकास तक का सफर
आज जिन इलाकों में पर्यटक सुकून और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंच रहे हैं, कभी वही क्षेत्र नक्सली गतिविधियों का गढ़ हुआ करते थे. हरखाड़ और गरही क्षेत्र में वर्ष 1998 से 2007 तक कई बड़ी नक्सली घटनाएं हुई थीं. लेकिन सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास योजनाओं के प्रभाव से पिछले कुछ वर्षों में हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब इन क्षेत्रों की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि पर्यटन, प्रकृति और विकास से जुड़ रही है. यह बदलाव केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि पूरे समाज के सकारात्मक परिवर्तन की कहानी भी है.
पर्यटन से बदल सकती है जिले की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि गरही डैम, पंचभूर झरना, गिद्धेश्वर पर्वत श्रृंखला और विशाल वन क्षेत्र को एकीकृत पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो जमुई बिहार के प्रमुख पर्यटन जिलों में शामिल हो सकता है. यहां इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वाटर टूरिज्म, कैंपिंग और ग्रामीण पर्यटन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. इससे न केवल जिले की पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और आर्थिक अवसर भी प्राप्त होंगे.
एक नजर में जमुई की पर्यटन ताकत
1.53 लाख एकड़ से अधिक वनाच्छादित क्षेत्र.
71 हजार एकड़ से अधिक आरक्षित वन भूमि.गरही डैम में बोटिंग, पिकनिक और इको-टूरिज्म की संभावनाएं.
बिहार के दूसरे फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की प्रस्तावित परियोजना.ईको-कॉटेज निर्माण की स्वीकृत योजना.
पंचभूर झरना में गर्म और ठंडे पानी के प्राकृतिक स्रोत.गिद्धेश्वर की सात पर्वत श्रृंखलाएं.
ट्रेकिंग, कैंपिंग और एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं.नई पहचान की ओर बढ़ रहा है जमुई
जमुई की धरती ने वर्षों तक संघर्ष और चुनौतियों का दौर देखा है. लेकिन अब यही धरती अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन क्षमता के दम पर नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है. यदि योजनाबद्ध तरीके से इन संसाधनों का विकास किया गया, तो आने वाले वर्षों में जमुई न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में गिना जा सकता है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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