बिहार के इस जिले में 7 अप्रैल से चलेगा बुलडोजर, रेलवे की नोटिस से कई परिवारों को बेघर होने का खतरा

बुलडोजर एक्शन की सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: जमुई में रेलवे की नोटिस के बाद 60 से अधिक महादलित परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है. वर्षों से रेलवे परिसर में रह रहे ये लोग अब 6 अप्रैल तक जगह खाली करने के आदेश से परेशान हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं.
Bihar News: बिहार के जमुई में पांच दशक से रेलवे परिसर में रह रहे महादलित परिवारों पर अब बेघर होने का संकट मंडरा रहा है. 60 से ज्यादा परिवारों को जगह खाली करने का नोटिस दिया गया है, जिससे उनके सामने अब रहने का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
6 अप्रैल तक खाली करने का अल्टीमेटम
रेल प्रशासन ने परिसर में बनी करीब 40 झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे महादलित परिवारों को नोटिस जारी कर 6 अप्रैल तक जगह खाली करने का निर्देश दिया है. चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय तक जगह खाली नहीं हुई तो 7 अप्रैल से बुलडोजर चलाया जाएगा.
50 साल से बसे परिवार, अब उजड़ने का डर
इन परिवारों का कहना है कि उनका पूरा जीवन यहीं बीत गया. कई पीढ़ियां इसी अस्थायी आशियाने में पली-बढ़ी हैं. अब अचानक नोटिस मिलने से उनके सामने सड़क पर आने की नौबत आ गई है. परिवारों में छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं, जिनके लिए कहीं और जाकर बसना आसान नहीं है.
सरकारी पर्चा मिला, लेकिन जमीन पर कब्जा
करीब 20 साल पहले सरकार ने 97 परिवारों को बसाने के लिए जमीन का पर्चा दिया था. लेकिन आज तक उन्हें वहां बसाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई. स्थिति यह है कि जिस जमीन पर उन्हें बसना था, उस पर अब अन्य लोगों का कब्जा हो चुका है. इससे सरकारी योजना अधूरी ही रह गई.
200 से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट में
इन परिवारों के 200 से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं. साथ ही कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन्हें मिल रहा है. बावजूद इसके, इनके स्थायी आवास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
परित्यक्त रेलवे क्वार्टर भी तोड़े जा रहे
रेलवे प्रशासन ने 142 परित्यक्त क्वार्टरों को भी तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इन क्वार्टरों में करीब तीन दर्जन परिवार रह रहे हैं. बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इन परिवारों को हटाने के फैसले की हर ओर आलोचना हो रही है.
जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार, नहीं मिला समाधान
नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवारों ने दानापुर डीआरएम, स्थानीय विधायक, नगर परिषद के मुख्य पार्षद और आंबेडकर विकास मंच के पदाधिकारियों से मदद की अपील की है. लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है.
आंदोलन की चेतावनी
परिवारों ने साफ कहा है कि जब तक उन्हें स्थायी आवास नहीं मिलेगा, वे जगह खाली नहीं करेंगे. उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
30 मार्च को अंचलाधिकारी से मुलाकात
प्रभावित परिवार 30 मार्च को अंचलाधिकारी से मिलकर जमीन की मांग करेंगे. उनका कहना है कि शक्तिघाट में दी गई जमीन पर कब्जा हटाकर उन्हें बसाया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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